खामनेई के जनाजे से 3 मुस्लिम देशों की दूरी….इसके पीछे क्या है असली कहानी

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में कई देशों ने अपने प्रतिनिधि भेजे, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और कुवैत की गैरमौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा में रही। इन तीनों मुस्लिम देशों का फैसला सिर्फ प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे खाड़ी क्षेत्र की बदलती कूटनीति, सुरक्षा चिंताओं और ईरान के साथ रिश्तों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
तीन मुस्लिम देशों की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय
तेहरान में आयोजित अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत, चीन, रूस, तुर्की, पाकिस्तान और मध्य एशिया के कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। हालांकि UAE, बहरीन और कुवैत ने अपना कोई आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा। मुस्लिम बहुल होने के बावजूद इन देशों की अनुपस्थिति ने खाड़ी क्षेत्र की राजनीति पर नए सवाल खड़े कर दिए।
सुरक्षा और कूटनीति बनी बड़ी वजह
रिपोर्ट के अनुसार, हालिया ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के दौरान ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक परिसंपत्तियों को निशाना बनाया था। इसके बाद UAE, बहरीन और कुवैत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं। ऐसे में तेहरान में उच्चस्तरीय उपस्थिति उनके लिए राजनीतिक रूप से असहज मानी जा रही है। बहरीन पहले से ही ईरान पर अपने आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाता रहा है। वहीं UAE का ईरान के साथ द्वीपों को लेकर पुराना क्षेत्रीय विवाद भी जारी है। कुवैत ने अपेक्षाकृत संतुलित रुख रखा है, लेकिन वह भी ईरान के प्रति सतर्क नीति अपनाता रहा है।
सऊदी, कतर और ओमान ने अलग संदेश दिया
दूसरी तरफ सऊदी अरब, कतर और ओमान ने खामेनेई के अंतिम संस्कार में अपने प्रतिनिधि भेजे। सऊदी अरब ने उपविदेश मंत्री के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजकर संकेत दिया कि वह ईरान के साथ तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। कतर ने भी संतुलित कूटनीतिक रुख बनाए रखा, जबकि ओमान ने एक बार फिर क्षेत्रीय मध्यस्थ की अपनी पारंपरिक भूमिका को कायम रखा।
GCC के भीतर अलग-अलग रणनीति
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के छह सदस्य देशों के बीच लंबे समय से ईरान को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं। ईरान और कई खाड़ी देशों के बीच धार्मिक, राजनीतिक और क्षेत्रीय मतभेद पहले से मौजूद हैं। ऐसे में खामेनेई के अंतिम संस्कार में अलग-अलग देशों की मौजूदगी और अनुपस्थिति ने यह साफ कर दिया कि अब क्षेत्रीय राजनीति में धार्मिक पहचान से ज्यादा राष्ट्रीय हित और सुरक्षा प्राथमिकता बन चुके हैं।
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ईरान ने अमेरिकी दबाव की बात कही
एक न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि कुछ अरब देशों पर अमेरिका की ओर से दबाव बनाया गया था। हालांकि UAE, बहरीन और कुवैत ने इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी।












