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Khamenei Funeral:अली खामेनेई की ऐतिहासिक अंतिम यात्रा आज, 1989 जैसी भगदड़ रोकने के लिए कड़े इंतजाम

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की आज तेहरान में मुख्य अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान लाखों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। 1989 जैसी भगदड़ से बचने के लिए प्रशासन ने अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए हैं।
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अली खामेनेई की ऐतिहासिक अंतिम यात्रा आज, 1989 जैसी भगदड़ रोकने के लिए कड़े इंतजाम
रान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की आज तेहरान में मुख्य अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मुख्य अंतिम यात्रा आज यानी सोमवार, 6 जुलाई को राजधानी Tehran में निकाली जाएगी। इस अंतिम यात्रा में लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। पिछले दो दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग Tehran पहुंच रहे हैं, ताकि अपने नेता को आखिरी विदाई दे सकें।

Ali Khamenei और उनके परिवार के कई सदस्यों के पार्थिव शरीर को Tehran की ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। यहां हजारों लोग लगातार पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। सरकार का अनुमान है कि अंतिम यात्रा में अब तक की सबसे बड़ी भीड़ देखने को मिल सकती है।

सुबह 6 बजे शुरू होगी अंतिम यात्रा

आयोजकों के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 6 बजे अंतिम यात्रा की शुरुआत होगी। यह यात्रा Tehran के कई प्रमुख इलाकों से होकर गुजरेगी और करीब 10 से 12 घंटे तक चलेगी। रास्ते में जगह-जगह लोगों के अंतिम दर्शन की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था या दुर्घटना न हो।

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1989 जैसी भगदड़ दोबारा न हो

ईरानी सरकार इस बार सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क नजर आ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह साल 1989 की वह दर्दनाक घटना है, जब तत्कालीन सुप्रीम लीडर आयतुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार में भारी भगदड़ मच गई थी। उस समय करीब एक करोड़ लोग अंतिम यात्रा में पहुंचे थे। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि हालात बेकाबू हो गए थे। इस हादसे में 10 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 10 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

मस्जिद में बनाई गईं कंक्रीट की दीवारें

रविवार को भी हजारों लोग ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद पहुंचे और Ali Khamenei सहित उनके परिवार के चार सदस्यों को श्रद्धांजलि दी।
भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए प्रशासन ने मस्जिद के अंदर ताबूतों और श्रद्धालुओं के बीच बड़ी-बड़ी कंक्रीट की दीवारें बनाई हैं। इसके अलावा पुलिस, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और सुरक्षा बलों की बड़ी संख्या में तैनाती की गई है।

अमेरिका-इजरायल के हमले में हुई थी मौत

Ali Khamenei और उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों की मौत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमलों में हुई थी। इन हमलों के बाद पूरे ईरान में शोक की लहर फैल गई थी। इसके बाद देशभर में कई दिनों तक श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं। अब उनकी मुख्य अंतिम यात्रा निकाली जा रही है, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग शामिल होने पहुंचे हैं।

चार देशों में होंगे श्रद्धांजलि कार्यक्रम

Ali Khamenei की अंतिम विदाई सिर्फ Tehran तक सीमित नहीं रहेगी। कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को Tehran में मुख्य अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। मंगलवार को धार्मिक शहर कोम में श्रद्धांजलि कार्यक्रम होगा। बुधवार को इराक के नजफ और कर्बला में विशेष आयोजन किए जाएंगे। इसके बाद गुरुवार को उत्तर-पूर्वी ईरान के उनके पैतृक शहर मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इन सभी कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में धार्मिक नेता, सरकारी अधिकारी और आम नागरिक शामिल होने की संभावना है।

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 मोजतबा अब भी नहीं आए सामने

रविवार को आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान Ali Khamenei के तीन बेटे पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए। हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को लेकर हो रही है। पिता की मौत के बाद उन्हें नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक वे सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। उनकी गैरमौजूदगी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

हमले में घायल हुए थे मोजतबा?

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि 28 फरवरी के हवाई हमलों में मोजतबा खामेनेई घायल हो गए थे। हालांकि उनकी चोट कितनी गंभीर है, इस बारे में सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। इसी वजह से वे अब तक सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुए हैं। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर फिलहाल अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

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रिवोल्यूशनरी गार्ड्स प्रमुख अहमद वाहिदी भी पहुंचे

रविवार को हुए अंतिम दर्शन के दौरान अहमद वाहिदी भी दूसरी बार सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए। उन्हें 28 फरवरी के हमले में मारे गए पुराने कमांडर की जगह रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का नया प्रमुख बनाया गया है। दिलचस्प बात यह रही कि पूरे युद्ध के दौरान अहमद वाहिदी सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। लेकिन अब वे अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों में खुलकर शामिल हो रहे हैं।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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