करवा चौथ आज:पूरे देश में कब दिखेगा चाँद, इंदौर से भोपाल सहित कितने बजे दिखेगा?

इंदौर। पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ आज, गुरुवार 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पर्व मनाया जा रहा है। इस अवसर पर महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण कर निर्जला व्रत रखती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को करवा माता की पूजा की जाती है। रात में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है। इंदौर में अलग-अलग पंचांगों के अनुसार चंद्रोदय का समय रात 8:34 से 8:39 बजे के बीच बताया गया है। वहीं, स्थानीय पंचांग के अनुसार करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:51 बजे से 7:07 बजे तक है। चंद्रमा के दर्शन का समय स्थान और पंचांग की गणना के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
शाम को पूजा, रात में चांद का इंतजार
करवा चौथ पर सुबह से ही घरों में उत्सव का माहौल रहता है। महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर सोलह शृंगार करती हैं और शाम को पूजा की तैयारी करती हैं। पूजा के दौरान करवा माता की कथा सुनी जाती है और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। रात में चंद्रमा निकलने के बाद महिलाएं उसे अर्घ्य देती हैं। कई परिवारों में छलनी से पहले चांद और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा है। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोला जाता है।
क्या है सरगी का महत्व?
करवा चौथ की परंपरा में सरगी का विशेष महत्व है। इसे आमतौर पर सास अपनी बहू को देती हैं। इसमें फल, मिठाइयां, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं और इसके बाद व्रत शुरू करती हैं।
| शहर | चांद निकलने का समय | पूजा का शुभ मुहूर्त |
|---|---|---|
| इंदौर | रात 8:39 बजे | शाम 5:51 से 7:07 बजे |
| भोपाल | रात 8:31 बजे | शाम 5:44 से 7:00 बजे |
| उज्जैन | रात 8:38 बजे | शाम 5:51 से 7:07 बजे |
देश के अन्य प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का समय
| शहर | चांद निकलने का अनुमानित समय |
|---|---|
| दिल्ली | रात 8:17 बजे |
| जयपुर | रात 8:28 बजे |
| मुंबई | रात 9:00 बजे |
| अहमदाबाद | रात 8:52 बजे |
| लखनऊ | रात 8:06 बजे |
| चंडीगढ़ | रात 8:12 बजे |
| बेंगलुरु | रात 8:55 बजे |
| कोलकाता | रात 7:47 बजे |
1. करवा चौथ नाम कैसे पड़ा?
करवा का अर्थ मिट्टी के उस पात्र से है, जिसका इस्तेमाल पूजा और जल अर्पित करने में किया जाता है। चौथ का संबंध चतुर्थी तिथि से है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को यह पर्व मनाया जाता है।
2. छलनी से चांद देखने की परंपरा क्यों है?
करवा चौथ पर कई महिलाएं छलनी से चंद्रमा को देखती हैं और फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखती हैं। यह एक लोकप्रिय पारंपरिक रस्म है। अलग-अलग परिवारों में इसकी विधि और मान्यताएं अलग हो सकती हैं।
3. चंद्रमा को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?
हिंदू धार्मिक परंपराओं में चंद्रमा को शीतलता, मन और भावनाओं से जोड़कर देखा जाता है। करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
4. सरगी का क्या महत्व है?
सरगी आमतौर पर सास की ओर से बहू को दी जाने वाली भोजन सामग्री होती है, जिसे सूर्योदय से पहले खाया जाता है। इसमें मिठाइयां, फल, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं। यह परंपरा परिवार के स्नेह और आशीर्वाद का प्रतीक मानी जाती है।
5. सोलह शृंगार का क्या है महत्व?
करवा चौथ पर महिलाएं पारंपरिक रूप से साड़ी या अन्य उत्सवी परिधान पहनती हैं और मेहंदी, बिंदी, चूड़ियां, सिंदूर व आभूषणों से शृंगार करती हैं। कई समुदायों में सोलह शृंगार को सौभाग्य और वैवाहिक जीवन की खुशहाली से जोड़ा जाता है।
6. करवा चौथ की कथा में वीरावती का उल्लेख
करवा चौथ से जुड़ी प्रचलित कथाओं में वीरावती की कहानी सुनाई जाती है। कथा के अनुसार, अपने भाइयों के छल से चंद्रमा निकलने का भ्रम होने पर वीरावती ने व्रत खोल लिया था। बाद में उसे अपने पति की स्थिति का पता चला और उसने पुनः श्रद्धापूर्वक व्रत किया। इस कथा के अलग-अलग संस्करण प्रचलित हैं।
7. क्या केवल विवाहित महिलाएं ही रखती हैं व्रत?
परंपरागत रूप से यह विवाहित महिलाओं का पर्व माना जाता है। हालांकि, कुछ अविवाहित महिलाएं भी अपनी मान्यताओं और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार मनचाहे जीवनसाथी की कामना के लिए व्रत रखती हैं।
8. करवा चौथ पर लाल रंग क्यों पहना जाता है?
भारतीय परंपरा में लाल रंग को प्रेम, उत्साह, सौभाग्य और मांगलिक अवसरों से जोड़ा जाता है। इसलिए करवा चौथ पर लाल रंग की साड़ी, चूड़ियां और अन्य लाल परिधान पहनना लोकप्रिय है। हालांकि, महिलाएं अपनी पसंद के दूसरे रंग भी पहनती हैं।
9. करवा चौथ और बदलती परंपराएं
आज कई परिवारों में पति भी पत्नी के साथ व्रत रखते हैं। कुछ दंपती इसे एक-दूसरे के प्रति प्रेम, सम्मान और साथ निभाने के संकल्प के रूप में मनाते हैं। इस तरह पर्व की परंपराएं समय के साथ नए रूप भी ले रही हैं।
10. करवा चौथ पर चांद का इंतजार इतना खास क्यों?
इस पर्व पर पूरे दिन व्रत रखने के बाद महिलाओं को चंद्रमा के दर्शन का इंतजार रहता है। चांद निकलने पर पूजा, अर्घ्य और पारंपरिक रस्में पूरी की जाती हैं। यही वजह है कि चंद्रोदय का समय हर साल करवा चौथ की चर्चाओं का प्रमुख हिस्सा बन जाता है।




















