नीम करोली बाबा के दरबार में उमड़ा जनसैलाब!स्थापना दिवस पर कैंची धाम में दर्शन को लगी लंबी कतारें

नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम में सोमवार को स्थापना दिवस के अवसर पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। तड़के सुबह से ही बाबा नीम करोली बाबा के दर्शन के लिए हजारों लोग कतारों में खड़े दिखाई दिए। देश के अलग अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचे हैं। पूरे परिसर में भजन, हनुमान चालीसा और धार्मिक अनुष्ठानों का माहौल बना हुआ है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए हैं ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
सुबह से ही दर्शन के लिए उमड़ी भीड़
कैंची धाम में सुबह कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ तेजी से बढ़ने लगी। कई भक्त रात से ही मंदिर के आसपास डेरा डाले हुए थे ताकि उन्हें सबसे पहले दर्शन का अवसर मिल सके। सुबह के शुरुआती घंटों में ही हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके थे। दिन चढ़ने के साथ भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती रही और पूरा क्षेत्र आस्था के रंग में रंगा नजर आया। मंदिर परिसर में हनुमान चालीसा, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया।
मालपुए के प्रसाद की खास परंपरा
स्थापना दिवस के अवसर पर श्रद्धालुओं के बीच प्रसिद्ध मालपुए का प्रसाद वितरित किया जा रहा है। कैंची धाम में यह प्रसाद विशेष महत्व रखता है और हर वर्ष भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ इसे ग्रहण करते हैं। प्रसाद वितरण के लिए अलग व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि भीड़ के बावजूद लोगों को सुविधा मिल सके।
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सुरक्षा के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में 1500 से अधिक पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। यातायात को नियंत्रित करने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है। कई स्थानों पर वाहनों की आवाजाही को सीमित किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन का अवसर मिल सके।
कौन थे बाबा नीम करोली बाबा?
बाबा नीम करोली बाबा 20वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध संतों में गिने जाते हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका मूल नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा बताया जाता है। कम उम्र में ही उन्होंने आध्यात्मिक जीवन का मार्ग अपनाया और देशभर में साधना तथा सेवा कार्यों में अपना जीवन समर्पित किया। नीम करोली बाबा ने हमेशा प्रेम, सेवा, करुणा और मानवता का संदेश दिया। उनके अनुयायी उन्हें हनुमान जी का परम भक्त मानते हैं। उनके जीवन से जुड़ी कई घटनाओं को श्रद्धालु चमत्कार के रूप में देखते हैं। यही वजह है कि आज भी देश विदेश से लाखों लोग उनकी शिक्षाओं और आशीर्वाद में विश्वास रखते हैं।
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कैसे शुरू हुआ था कैंची धाम?
बताया जाता है कि नीम करोली बाबा पहली बार वर्ष 1961 में इस स्थान पर पहुंचे थे। उन्हें यह जगह आध्यात्मिक साधना और आश्रम निर्माण के लिए उपयुक्त लगी। इसके बाद यहां एक बड़े आध्यात्मिक केंद्र की नींव रखी गई। 15 जून 1964 को कैंची धाम आश्रम की स्थापना हुई और इसी दिन हनुमान जी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। तभी से हर साल 15 जून को स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज कैंची धाम देश के सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थलों में शामिल है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं।











