BJP से अलग हुए के. अन्नामलाई :18 महीने के मतभेद के बाद दिया इस्तीफा, नई पार्टी बनाने की चर्चा तेज

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल रहे के. अन्नामलाई ने भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार भी कर लिया है। अन्नामलाई ने अपने इस्तीफे में कहा है कि, पिछले 18 महीनों से पार्टी की शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके विचार नहीं मिल रहे थे और तमिलनाडु की राजनीति को आगे बढ़ाने के तरीके पर मतभेद लगातार बढ़ते गए।
अन्नामलाई का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु में भाजपा अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा इस बात की है कि, क्या अन्नामलाई अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे या फिर किसी नए सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत करेंगे।
अमित शाह से मुलाकात के बाद दिया इस्तीफा
जानकारी के मुताबिक, अन्नामलाई ने 2 जून को दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, संगठन महामंत्री बीएल संतोष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसी दौरान उन्होंने पार्टी छोड़ने की इच्छा जाहिर की। बताया जाता है कि भाजपा नेतृत्व ने उन्हें मनाने की कोशिश भी की, लेकिन अन्नामलाई अपने फैसले पर कायम रहे। इसके बाद पार्टी ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। भाजपा मुख्यालय प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह के हस्ताक्षर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया कि अन्नामलाई अब भाजपा के प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं।
इस्तीफे में अन्नामलाई ने क्या लिखा?
अपने पत्र में अन्नामलाई ने कहा कि, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व से प्रभावित होकर भाजपा में आए थे। उनका उद्देश्य तमिलनाडु की राजनीति में बदलाव लाना और आम लोगों को राजनीति से जोड़ना था।
उन्होंने लिखा कि, मैं उस सोच को बदलना चाहता था जिसके अनुसार राजनीति केवल रईसों और कुछ खास लोगों के लिए है। अन्नामलाई ने भाजपा नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि एक युवा और अपेक्षाकृत अनुभवहीन व्यक्ति होने के बावजूद उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गईं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि, पिछले डेढ़ साल में पार्टी नेतृत्व और उनके बीच राजनीतिक रणनीति को लेकर गंभीर मतभेद पैदा हो गए थे।

तमिलनाडु की राजनीति में बदलाव की कोशिश
अन्नामलाई ने अपने पत्र में कहा कि तमिलनाडु की जनता वर्षों से एक जैसी राजनीतिक बहसों और परंपरागत राजनीति से ऊब चुकी है। राज्य में कई बार बदलाव की लहरें उठीं, लेकिन वे स्थायी नहीं बन सकीं। उनका दावा है कि, उन्होंने भाजपा को ऐसी भाषा और शैली में जनता तक पहुंचाने की कोशिश की जिसे तमिलनाडु के लोग आसानी से समझ सकें। कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों के बावजूद वे इसमें काफी हद तक सफल भी रहे।
क्या बनाएंगे नई पार्टी?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अन्नामलाई 7 जून को अपने कोर समर्थकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाले हैं। इस बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। अन्नामलाई के करीबी लोगों का कहना है कि, वे राष्ट्रवादी-तमिल दर्शन पर आधारित एक गैर-राजनीतिक आंदोलन शुरू कर सकते हैं। भविष्य में जनसमर्थन मिलने पर इसे राजनीतिक दल का रूप भी दिया जा सकता है। कई राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि, तमिलनाडु में भाजपा से अलग होने के बाद अन्नामलाई अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश करेंगे।
BJP को कितना नुकसान हो सकता है?
अन्नामलाई के जाने को तमिलनाडु भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं-
1. युवाओं के बीच प्रभाव कम हो सकता है
अन्नामलाई ने खुद को युवा, आक्रामक और साफ छवि वाले नेता के रूप में स्थापित किया था। सोशल मीडिया और शहरी मध्यम वर्ग में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनके जाने से भाजपा की युवा वोटरों तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।
2. सबसे बड़ा राज्य स्तरीय चेहरा खोना
पिछले चार-पांच वर्षों में तमिलनाडु भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा अन्नामलाई ही रहे। पार्टी के पास फिलहाल उनके समान लोकप्रियता और पहचान वाला नेता नहीं दिखता।
3. DMK विरोधी राजनीति को झटका
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सरकार के खिलाफ अन्नामलाई सबसे मुखर नेताओं में शामिल थे। उनके अलग होने से विपक्षी राजनीति में भाजपा की धार कुछ कमजोर पड़ सकती है।
फिर भी क्यों सीमित रह सकता है असर?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अन्नामलाई के जाने से भाजपा को नुकसान जरूर होगा, लेकिन इसका असर पूरी तरह विनाशकारी नहीं होगा।
मोदी फैक्टर अब भी मजबूत
तमिलनाडु में भाजपा का एक बड़ा वोट बैंक प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के आधार पर पार्टी का समर्थन करता है। इसलिए पूरा वोट आधार अन्नामलाई पर निर्भर नहीं माना जाता।
NDA गठबंधन का सहारा
यदि All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) जैसे सहयोगी दल भाजपा के साथ बने रहते हैं, तो संगठनात्मक नुकसान की भरपाई कुछ हद तक हो सकती है।
IPS से राजनीति तक: अन्नामलाई का सफर
42 वर्षीय अन्नामलाई का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है।
2011: कर्नाटक कैडर के IPS अधिकारी बने।
2019: भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफा दिया।
25 अगस्त 2020: भाजपा में शामिल हुए।
2020: तमिलनाडु भाजपा के उपाध्यक्ष बनाए गए।
2021: तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष बने।
2021: अरावाकुरिची विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, हार गए।
2023: 'एन मन्न, एन मक्कल' पदयात्रा शुरू की।
2024: कोयंबटूर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके।
2025: प्रदेश अध्यक्ष पद से हटे।
2026: विधानसभा चुनाव में NDA के लिए प्रचार किया, लेकिन स्वयं चुनाव नहीं लड़ा।
जून 2026: भाजपा से इस्तीफा।
अन्नामलाई के नेतृत्व में बढ़ा BJP का वोट शेयर
अन्नामलाई को तमिलनाडु में भाजपा का संगठन मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है। उनके कार्यकाल में पार्टी ने बूथ स्तर तक विस्तार पर जोर दिया। राजनीतिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में भाजपा का वोट शेयर लगातार बढ़ा। 2021 विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट प्रतिशत लगभग 2.62% था, जो 2026 विधानसभा चुनाव में बढ़कर करीब 11.3% तक पहुंच गया। हालांकि, सीटों के मामले में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
2026 चुनाव ने बदल दिया राजनीतिक गणित
हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा केवल एक सीट जीत सकी। वहीं अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम ने 108 सीटें जीतकर सभी राजनीतिक दलों को चौंका दिया। TVK का प्रदर्शन इतना बड़ा रहा कि उसकी सीटें DMK और AIADMK की कुल सीटों से भी ज्यादा रहीं। ऐसे माहौल में अन्नामलाई का भाजपा से अलग होना तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।











