छिंदवाड़ा: जुन्नारदेव में निकली तिरंगा यात्रा, अधिकारी नहीं हुए शामिल; स्थानीय लोगों में दिखी नाराजगी

छिंदवाड़ा। तिरंगा यात्रा भीमराव अंबेडकर चौक, पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौक, नुक्कड़ चौक और सब्जी मंडी होते हुए आगे बढ़ी। डीजे पर बज रहे देशभक्ति के गीतों के बीच स्कूली बच्चे नारे लगाते हुए करीब 2 किलोमीटर तक पैदल चले। रैली में एसडीएम, तहसीलदार, सीईओ सहित कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी नजर नहीं आए, जबकि बैठक में सभी को शामिल होने के निर्देश दिए गए थे। रैली खत्म होने के बाद छात्र-छात्राओं को खाना नहीं मिलने को लेकर भी आम लोगों ने सवाल उठाए और जिला कलेक्टर से जांच की मांग की।
अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नागरिकों में रोष
तिरंगा यात्रा में शासकीय अधिकारी और कर्मचारियों की मौजूदगी काफी कम रही। नगर के नागरिकों ने अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर गहरा रोष जताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव के विशेष निर्देश पर आयोजित इस रैली में प्रशासन के अधिकारियों की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठाए गए। बताया जा रहा है कि रैली के आयोजन संबंधी निर्देश बीते दिनों जनपद पंचायत परिसर में आयोजित बैठक में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को दिए जा चुके थे। इसके बावजूद रैली में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी नहीं रही, जिसे लोगों ने दुखद और गंभीर विषय बताया।
ग्वालियर: गढ़ी रियासत के वंशज हनुमत सिंह ने की खुदकुशी, लाइसेंसी राइफल से खुद को मारी गोली
कई विभागों के अधिकारी रैली में नहीं पहुंचे
रैली में नगर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी एसडीएम, तहसीलदार और सीईओ सहित कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी अनुपस्थित रहे। कृषि विभाग, पशु विभाग, पीडब्ल्यूडी, एमपीईबी, खाद्य विभाग और महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी सहित कई अधिकारियों के रैली में शामिल नहीं होने की बात सामने आई। आम नागरिकों ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन की ओर से ही रैली का आयोजन किया गया था और अधिकारियों को पहले से निर्देश दिए गए थे, तो फिर इतनी बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी इसमें क्यों शामिल नहीं हुए। नागरिकों और बुद्धिजीवियों ने इस मामले में जिला कलेक्टर से जांच कराने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
2 किलोमीटर पैदल चले बच्चे, खाना तक नहीं मिला
तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में शामिल स्कूली छात्र-छात्राओं ने करीब 2 किलोमीटर का सफर पैदल तय किया। रैली खत्म होने के बाद इन बच्चों के लिए किसी भी प्रकार के स्वल्पाहार की व्यवस्था नहीं किए जाने को लेकर भी आम लोगों ने सवाल उठाए। लंबी दूरी तक पैदल चलने के बाद थक चुके छात्र-छात्राएं रैली समाप्त होते ही अपने घरों की ओर रवाना हो गए, जहां उन्हें भोजन मिल सका। नागरिकों का कहना है कि तिरंगा यात्रा जैसे आयोजन में बच्चों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए था। प्रशासन की ओर से लगातार बरती गई ऐसी लापरवाहियों को लेकर लोगों ने जिला कलेक्टर से पूरे मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।












