Crime News :नौकरी का झांसा ; इन्वेस्टमेंट लेने बाद ब्लॉक कर साइबर धोखाधड़ी, करोड़ों का रैकेट का भंडा फोड़

दिल्ली पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के मामले में एक प्राइवेट बैंक के कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने फर्जी बैंक खाते खुलवाकर उनका उपयोग धोखाधड़ी की रकम ट्रांसफर करने के लिए किया। इसके बाद बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। 
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नौकरी का झांसा ; इन्वेस्टमेंट लेने बाद ब्लॉक कर साइबर धोखाधड़ी, करोड़ों का रैकेट का भंडा फोड़
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली।  दिल्ली पुलिस ने एक निजी बैंक के कर्मचारी को साइबर धोखाधड़ी रैकेट में कथित रूप से सहयोग करने के आरोप में गिरफ्तार किया है जिसने फर्जी बैंक खातों और ऑनलाइन घोटालों के माध्यम से कई पीड़ितों से करोड़ों रुपये ठगे। पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। आरोपी इरशाद मलिक (35) गाजियाबाद निवासी और आरबीएल बैंक का कर्मचारी है जिसे अपराध शाखा की डब्ल्यूआर-II यूनिट की एक टीम ने गिरफ्तार किया।

    बिना KYC सत्यापन खोले खाते

    पुलिस ने बताया कि मलिक ने उचित केवाईसी सत्यापन के बिना बैंक खाता खोलने के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया जिसका बाद में धोखाधड़ी से प्राप्त धन को स्थानांतरित करने के लिए उपयोग किया गया। यह मामला अक्टूबर 2023 का है जब द्वारका के साइबर पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें एक पुलिस अधिकारी ने धोखाधड़ी वाले लेनदेन के माध्यम से अपने एसबीआई खाते से 88,000 रुपए की अनधिकृत निकासी की सूचना दी थी।

    आरबीएल में फर्जी खाता

    पुलिस ने कहा कि धन के लेन-देन के आधार पर जांचकर्ताओं को "लॉरी ट्रेड एक्जिम" के नाम से एक आरबीएल बैंक खाता मिला जिसे जाली दस्तावेजों का उपयोग कर खोला गया था। पुलिस उपायुक्त (अपराध शाखा) हर्ष इंदोरा ने कहा, फोरेंसिक विश्लेषण से पुष्टि हुई कि खाता खोलने के फॉर्म पर मौजूद हस्ताक्षर कथित खाताधारक मनमोहन सिंह के हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते जिन्होंने इस तरह का खाता खोलने से इनकार किया है। पुलिस ने पाया कि सह-आरोपियों ने रोजगार दिलाने के बहाने उसके पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग किया था।

    नौकरियों और तुरंत फायदे का झांसा

    पुलिस उपायुक्त इंदोरा ने बताया, मलिक मुख्य आरोपी हरजिंदर उर्फ हरजी के संपर्क में आया और कमीशन के बदले फर्जी खाते खोलने में मदद की। बाद में इस खाते का उपयोग फेसबुक एवं इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित साइबर धोखाधड़ी में किया गया जहां पीड़ितों को अंशकालिक नौकरियों और त्वरित मुनाफे झांसा देकर टेलीग्राम समूहों में शामिल होने के लिए फंसाया गया। इंदोरा ने कहा, पीड़ितों द्वारा बड़ी रकम निवेश करने के बाद आरोपी उन्हें ब्लॉक कर देते थे और प्लेटफॉर्म बंद कर देते थे। उन्होंने आगे बताया कि चार सह-आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वे फिलहाल जमानत पर हैं। पुलिस उपायुक्त ने कहा कि पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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