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JNU में नारेबाजी पर एक्शन!छात्रों पर सस्पेंशन-निष्कासन की तैयारी

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के साबरमती परिसर में 6 जनवरी को हुई विवादित नारेबाजी पर प्रशासन सख्त हो गया है। प्रदर्शन से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद JNU प्रशासन ने इसे भड़काऊ और आचार संहिता का उल्लंघन बताया है।
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छात्रों पर सस्पेंशन-निष्कासन की तैयारी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    JNU के साबरमती परिसर में 6 जनवरी 2026 को हुए एक प्रदर्शन के दौरान लगाए गए विवादित नारों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इस प्रदर्शन से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें जेएनयू छात्र संघ (JNSU) से जुड़े कुछ छात्रों द्वारा आपत्तिजनक, उकसाने वाले और भड़काऊ नारे लगाए जाने की बात कही जा रही है। इन वीडियो का संज्ञान लेते हुए JNU प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी किया है।

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय की सुरक्षा शाखा को पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की नारेबाजी लोकतांत्रिक असहमति के दायरे में नहीं आती और यह विश्वविद्यालय की आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है।

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    सार्वजनिक शांति-सुरक्षा पर असर की चेतावनी

    यह भी पढ़ें: JNU में शरजील-उमर के समर्थन में प्रदर्शन : छात्रों ने 'मोदी-शाह तेरी कब्र खुदेगी' के लगाए नारे

    प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस तरह के कृत्य सार्वजनिक व्यवस्था, कैंपस की शांति और आपसी सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं। साथ ही इससे न केवल विश्वविद्यालय बल्कि देश की सुरक्षा पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। प्रशासन ने यह भी कहा कि ऐसे व्यवहार से संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक संवाद की मर्यादाओं के प्रति अनादर झलकता है। 

    JNU प्रशासन ने छात्रों और सभी संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे असहमति, दुर्व्यवहार के बीच स्पष्ट अंतर को समझें। प्रशासन का कहना है कि जहां असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, वहीं घृणास्पद भाषण समाज और कैंपस में अशांति फैलाने का कारण बनता है।

    बयान में यह भी कहा गया है कि सभी से अनुरोध किया जाता है कि वे ऐसी अनुचित गतिविधियों से दूर रहें और विश्वविद्यालय परिसर में शांति एवं सौहार्द बनाए रखने में सहयोग करें। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह बयान सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से जारी किया गया है।

    नफरत की जगह नहीं बन सकता विश्वविद्यालय

    विश्वविद्यालय इनोवेशन, नए विचारों और सकारात्मक बहस का केंद्र होते हैं। उन्हें नफरत फैलाने की प्रयोगशाला में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि, बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी को मौलिक अधिकार बताया गया है, लेकिन यह अधिकार कानून और संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर ही प्रयोग किया जाना चाहिए।

    देश विरोधी गतिविधियों पर जीरो टॉलरेंस

    JNU प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी तरह की हिंसा, गैरकानूनी गतिविधि या देश विरोधी व्यवहार को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना में शामिल पाए जाने वाले छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें तत्काल निलंबन, निष्कासन और जरूरत पड़ने पर विश्वविद्यालय से स्थायी रूप से बाहर करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

    दोषी छात्रों पर लटक रही कार्रवाई की तलवार

    JNU कैंपस में विवादित नारेबाजी का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। प्रशासन दोषी छात्रों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, गंभीर मामलों में छात्रों को न केवल निलंबन बल्कि स्थायी प्रतिबंध का भी सामना करना पड़ सकता है।

    पीएम-गृह मंत्री के खिलाफ नारेबाजी पर बवाल

    बता दें कि सोमवार रात हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी आपत्तिजनक नारे लगाए गए। इसको लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बयानबाजी तेज हो गई है। 

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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