भोपाल। राजधानी के मशहूर बड़ा तालाब को अतिक्रमण और प्रदूषण से मुक्त कराने के उद्देश्य से सांसद आलोक शर्मा ने सोमवार को कलेक्टोरेट में एक हाई लेवल मीटिंग आयोजित की। बैठक में कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह, एडीएम अंकुर मेश्राम, नगर निगम अपर आयुक्त तन्मय वशिष्ठ शर्मा, सभी एसडीएम और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
सांसद ने बड़े तालाब के लिए नए सिरे से मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। इस दौरान जब कलेक्टर ने तालाब के आसपास बचे अतिक्रमण की स्थिति पूछी, तो किसी भी एसडीएम के पास स्पष्ट जवाब नहीं था।
सांसद ने कहा कि बड़ा तालाब गंभीर प्रदूषण और अतिक्रमण की मार झेल रहा है। उन्होंने बताया कि तालाब का कुल भराव क्षेत्र लगभग 31 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन अतिक्रमण और सूखे के चलते यह सिमटकर केवल 8-9 वर्ग किलोमीटर रह गया है। आलोक शर्मा ने नगर निगम अधिकारियों से यह भी पूछा कि तालाब में कितने गंदे नालों का पानी गिर रहा है और उन्हें रोकने के लिए कितने एसटीपी बनाए गए हैं। नियमों के बावजूद तालाब के आसपास फार्म हाउस और मकानों का निर्माण हो रहा है, जिससे तालाब की सीमाएं लगातार खत्म होती जा रही हैं।
सांसद आलोक शर्मा ने बैठक में सवाल उठाया कि बड़ा तालाब से अतिक्रमण हटाने को लेकर NGT ने अब तक कितने आदेश जारी कर चुकी है और उनमें से कितने आदेशों पर जिला प्रशासन व नगर निगम ने वास्तव में अमल किया है। उन्होंने यह भी पूछा कि भविष्य में तालाब के आसपास दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए एनजीटी के निर्देशों के पालन हेतु कोई विशेष टीम गठित की गई है या नहीं। यदि टीम बनी है, तो उसने अब तक क्या-क्या कार्रवाई की है और उसके क्या ठोस परिणाम सामने आए हैं।
बड़े तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने के मामले में जिला कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह ने सभी SDM से अलग-अलग चर्चा कर यह जानने की कोशिश की कि बड़े तालाब के आसपास अतिक्रमण हटाने को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। कलेक्टर ने चारों एसडीएम को एक सप्ताह का समय देते हुए निर्देश दिए कि बड़े तालाब के किनारे मौजूद सभी प्रमुख (मेजर) प्राइमा फेसी अतिक्रमण एक हफ्ते के भीतर हटाए जाएं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब यह मामला नियमित निगरानी में रहेगा। आगे से हर सप्ताह अतिक्रमण हटाने और बड़ा तालाब को प्रदूषण से बचाने से जुड़ी कार्रवाई की समीक्षा बैठक अनिवार्य रूप से की जाएगी, ताकि लापरवाही की कोई गुंजाइश न रहे।