Naresh Bhagoria
7 Jan 2026
नई दिल्ली। दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में मंगलवार को छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की। यह प्रदर्शन दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में किया गया। सोशल मीडिया पर वायरल 35 सेकेंड के वीडियो में छात्र ‘मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर’ जैसे नारे लगाते दिखे।
वीडियो में छात्र ‘अंबानी राज की कब्र खुदेगी’ और ‘अडानी की कब्र खुदेगी’ जैसे नारे भी लगा रहे हैं। यह प्रदर्शन रात के समय साबरमती हॉस्टल के बाहर हुआ। JNUSU के संयुक्त सचिव दानिश अली और सचिव सुनील मौके पर मौजूद थे। वामपंथी संगठनों से जुड़े कई छात्र भी प्रदर्शन में शामिल हुए।
छात्र यह प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में कर रहे थे, जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज हुई। JNU छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि, हर साल 5 जनवरी को छात्र कैंपस में 2020 की हिंसा की निंदा करने के लिए विरोध प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, लगाए गए नारे वैचारिक थे और किसी व्यक्ति विशेष पर निर्देशित नहीं थे।
कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि, यह गुस्सा जाहिर करने का तरीका है। उनका कहना है कि, छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले और दिल्ली दंगों के मामलों पर नाराजगी जताई। उनका मानना है कि, उमर खालिद और शरजील इमाम के साथ नाइंसाफी हुई और यह कार्रवाई इसलिए हुई क्योंकि दोनों मुस्लिम हैं।
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5 जनवरी 2020 को JNU कैंपस में हिंसा भड़क गई थी। कुछ नकाबपोश लोगों ने तीन हॉस्टलों में छात्रों पर लाठी-डंडे, पत्थर और लोहे की छड़ें से हमला किया। दो घंटे तक अराजकता फैली, जिसमें कम से कम 28 लोग घायल हुए। फर्नीचर और निजी सामान भी क्षतिग्रस्त हुआ। फरवरी 2020 में दिल्ली में हिंसा फैल गई, जिसमें 53 लोगों की मौत, 250 से अधिक घायल और 750 से ज्यादा FIR दर्ज हुई।
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तिथि |
घटना |
परिणाम |
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5 जनवरी 2020 |
JNU कैंपस में हिंसा |
28 घायल, फर्नीचर और सामान क्षतिग्रस्त |
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फरवरी 2020 |
दिल्ली में हिंसा |
53 मौत, 250+ घायल, 750+ FIR |
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5 जनवरी 2026 |
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत खारिज की |
उमर और शरजील जेल में, नई याचिका पर 1 साल प्रतिबंध |
दिल्ली पुलिस ने कहा कि, उन्हें मामले की जानकारी है और जांच जारी है। JNU प्रशासन ने कहा कि, कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था पूरी है और किसी भी तरह की हिंसा रोकने के लिए सतर्कता बरती जा रही है।
JNU छात्रों ने यह विरोध प्रदर्शन वैचारिक तौर पर किया, लेकिन इसमें प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे भी शामिल थे। विशेषज्ञ मानते हैं कि, विश्वविद्यालयों में वैचारिक विरोध और आपत्तिजनक नारेबाजी के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।
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