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जबलपुर में जनवरी में डॉग बाइट के सर्वाधिक केस बढ़े, इंदौर में सबसे कम

सुप्रीम कोर्ट की फटकार और सख्त टिप्पणियों के बावजूद प्रदेश में आवारा कुत्तों के हमले रोकने के लिए ठोस योजना पर काम नहीं हो रहा है। जमीनी स्तर पर हालात चिंताजनक बने हुए हैं। नगरीय निकायों ने इसके लिए उचित प्रबंध नहीं किए हैं।
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जबलपुर में जनवरी में डॉग बाइट के सर्वाधिक केस बढ़े, इंदौर में सबसे कम
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रभा उपाध्याय, इंदौर। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार और सख्त टिप्पणियों के बावजूद प्रदेश में आवारा कुत्तों के हमलों पर प्रभावी नियंत्रण नजर नहीं आ रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ते डॉग बाइट मामलों को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों को ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। प्रदेश के चार प्रमुख शहरों के ताजा आंकड़े इस स्थिति को साफ दर्शाते हैं।

    डॉग बाइट केस जबलपुर में 191.6% बढ़े

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     पिछले साल जनवरी की तुलना में इस साल डॉग बाइट के मामलों में जबलपुर सबसे आगे है। यहां 191.6% वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बाद भोपाल में 23.53%, ग्वालियर में 11.69% और इंदौर में 5.67% वृद्धि दर्ज की गई है। यदि वास्तविक संख्या के आधार पर देखें तो सबसे ज्यादा मामले इंदौर में सामने आए हैं। वर्ष 2026 के जनवरी माह में इंदौर में 4,792, ग्वालियर में 2,904, जबलपुर में 2,438 और भोपाल में 693 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए। प्रतिशत के लिहाज से जबलपुर की स्थिति सबसे गंभीर है, जबकि कुल मामलों की संख्या में इंदौर शीर्ष पर बना हुआ है। यह स्थिति बताती है कि निदेर्शों के बावजूद आवारा कुत्तों की समस्या पर अभी तक प्रभावी और स्थायी नियंत्रण नहीं हो सका है।

    सुप्रीम कोर्ट के यह हैं निर्देश

    देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया हुआ है। कोर्ट ने कहा, यदि आवारा कुत्तों के कारण गंभीर चोट या मृत्यु होती है तो यह प्रशासनिक विफलता मानी जाएगी। यदि स्थानीय निकाय समस्या नियंत्रित करने में विफल रहते हैं, तो राज्य सरकारों को मुआवजा देना पड़ सकता है। आवारा कुत्तों की नसबंदी तेजी से की जाए, रेबीज टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। स्कूलों, अस्पतालों, अदालत परिसरों, बस और रेलवे स्टेशनों जैसे स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। कुत्तों की फीडिंग निर्धारित स्थानों पर ही की जाए। पकड़े गए कुत्तों के लिए उचित शेल्टर बनाए जाएं। उनकी देखभाल, टीकाकरण और निगरानी सुनिश्चित की जाए।

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    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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