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CAG Report :माइनिंग अफसरों ने ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने 1200 करोड़ रुपए की लगाई चपत  

प्रदेश के 20 जिलों में रॉयल्टी, मुद्रांक और स्टांप शुल्क के नाम पर बड़ा घोटाला किया गया है। CAG की रिपोर्ट के अनुसार खनिज अधिकारियों ने रॉयल्टी, मुद्रांक और स्टांप शुल्क कम आंका। इससे ठेकेदारों ने ज्यादा उत्खनन कर उत्पादन कम बताया।
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माइनिंग अफसरों ने ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने 1200 करोड़ रुपए की लगाई चपत  
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अशोक गौतम,भोपाल। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की हालिया रिपोर्ट में राज्य के खनिज विभाग में ठेकेदारों और अधिकारियों की कथित मिलीभगत से वर्ष 2020 से 2023 के बीच भारी राजस्व हानि का खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 1200 करोड़ की सरकार को चपत लगी है।  जांच में रॉयल्टी, मुद्रांक शुल्क और पंजीयन शुल्क के गलत आंकलन, मैनुअल रसीदों में छेड़छाड़ और औसत विक्रय मूल्य के अनुचित उपयोग जैसी अनियमितताएं सामने आईं। कई जिलों में तांबे की रॉयल्टी निर्धारण में लंदन मेटल एक्सचेंज दरों का समुचित विचार नहीं किया गया, जिससे अनुमानित राजस्व में बड़ी कमी दर्ज हुई।

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    खनिज राजस्व में गड़बड़ी

    हाल में विधानसभा के पटल पर रखी गई सीएजी की इस रिपोर्ट में खुलासा—रॉयल्टी का कम मूल्यांकन, मुद्रांक व पंजीयन शुल्क की कम वसूली। 7 जिलों में 200 करोड़ से ज्यादा का नुकसान।

    जिलावार अनियमितता का दायरा

    जांच में बालाघाट, छतरपुर, देवास, धार, ग्वालियर, झाबुआ, कटनी, नर्मदापुरम, राजगढ़, रीवा और सतना में प्रमुख गड़बड़ियां दर्ज की गईं। अलग से छिंदवाड़ा, जबलपुर और नीमच समेत 7 जिलों में शुल्क-आधारित रॉयल्टी निर्धारण में खामी पाई गई।

    क्या है गड़बड़ी का पैटर्न

    • रॉयल्टी निर्धारण में अंतरराष्ट्रीय दरों/औसत विक्रय मूल्य का गलत उपयोग।
    • मैनुअल रसीदों और संपदा अभिलेखों में असंगति।
    • पट्टा अवधि के पहले पांच वर्षों की उत्पादन-आधारित गणना में त्रुटि।
    • मुद्रांक, पंजीयन का आधार कम दिखाना।

    संभावित असर

    • राज्य राजस्व में बड़ी कमी और प्रतिस्पर्धा का विकृतिकरण।
    • उच्च-जोखिम क्षेत्रों की निगरानी व ई-रसीद प्रणाली की जरूरत।

    पंजीयक करेंगे प्रकरणों की गहन जांच

     खनिज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रकरणों की गहन जांच कर आवश्यक कार्रवाई हेतु जिला पंजीयक को भेजा जाएगा। अंतरराष्ट्रीय दरें मासिक व अस्थिर हैं।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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