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छात्रों का प्रदर्शन रोकने पहुंचे JMM कार्यकर्ता? पुतला दहन को लेकर भिड़े दोनों पक्ष, पुलिस ने संभाला मोर्चा

झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का आंदोलन शुक्रवार को कई जिलों में तनावपूर्ण हो गया। JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के आह्वान पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने निकले छात्रों का कई जगह विरोध हुआ।
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छात्रों का प्रदर्शन रोकने पहुंचे JMM कार्यकर्ता? पुतला दहन को लेकर भिड़े दोनों पक्ष, पुलिस ने संभाला मोर्चा
झारखंड में छात्रों का आंदोलन हुआ तनावपूर्ण

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं और JPSC-JSSC से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का आंदोलन अब तेज होता नजर आ रहा है। शुक्रवार को राज्य के कई जिलों में प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के आह्वान पर छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने का कार्यक्रम रखा था। इसी दौरान अलग-अलग जगहों पर छात्रों और सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हो गया। रांची, गिरिडीह, हजारीबाग और गढ़वा में प्रदर्शन के दौरान धक्का-मुक्की, झड़प और मारपीट की खबरें सामने आईं। कुछ जगहों पर स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। घटनाओं के बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है, जबकि छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

मुख्यमंत्री के पुतला दहन को लेकर शुरू हुआ विवाद

दरअसल, JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच से जुड़े छात्र भर्ती परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया से संबंधित कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष तरीके से जांच हो और यदि कहीं गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। इसी क्रम में आंदोलनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने का कार्यक्रम बनाया था। शुक्रवार को जब छात्र अलग-अलग स्थानों पर इस कार्यक्रम के लिए जुटे तो कई जगहों पर इसका विरोध किया गया।

रांची में भी पुतला दहन की तैयारी के दौरान माहौल बिगड़ गया। आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि JMM से जुड़े कुछ कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और उन्होंने प्रदर्शन का विरोध किया। छात्रों का दावा है कि इसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई और देखते ही देखते विवाद बढ़ गया।

छात्रों ने लगाया मारपीट का आरोप

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना है कि पुतला दहन के कार्यक्रम के दौरान उन्हें रोकने की कोशिश की गई। छात्रों का आरोप है कि विरोध के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। हालांकि, पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आ रहे हैं। इसलिए मामले की पूरी तस्वीर पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद मौके पर तनाव बढ़ गया और पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।

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गिरिडीह में भी आमने-सामने आए छात्र और JMM कार्यकर्ता

गिरिडीह में भी शुक्रवार को आंदोलन के दौरान विवाद की स्थिति बन गई। नगर थाना क्षेत्र के झंडा मैदान में छात्र और JMM कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच कहासुनी के बाद मामला बढ़ गया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें दौड़ाकर पीटा गया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। प्रशासन और पुलिस की ओर से स्थिति पर नजर रखी गई। इस घटना से जुड़े कुछ वीडियो और अलग-अलग दावे सोशल मीडिया पर भी सामने आए हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हर दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है।

हजारीबाग और गढ़वा में भी प्रदर्शन

छात्र आंदोलन का असर केवल रांची और गिरिडीह तक सीमित नहीं रहा। हजारीबाग और गढ़वा में भी छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। इन इलाकों में भी प्रदर्शन के दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनने की खबर है। प्रशासन की कोशिश रही कि प्रदर्शन को नियंत्रित रखा जाए और किसी तरह की बड़ी अप्रिय घटना न हो। छात्र संगठनों का कहना है कि उनका आंदोलन लंबे समय से चल रहा है और वे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहते हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा और नियुक्ति से जुड़े मामलों में अभ्यर्थियों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?

JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच से जुड़े छात्रों की मुख्य मांग भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़ी है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में किसी भी तरह की अनियमितता या गड़बड़ी की शिकायत सामने आने पर उसकी निष्पक्ष जांच हो। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी कई वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा या चयन प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो उम्मीदवारों के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है। इसी वजह से आंदोलनकारी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच, दोषियों पर कार्रवाई और चयन प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं।

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आंदोलन से क्यों बढ़ रही राजनीतिक गर्मी?

छात्र आंदोलन के उग्र होने के साथ ही झारखंड की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष ने प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्रों की आवाज सुनने के बजाय उनके आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शन और कथित मारपीट की घटनाओं को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है। वहीं, छात्र संगठन भी पीछे हटने के मूड में नहीं दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

पुलिस के सामने बड़ी चुनौती

कई जिलों में प्रदर्शन और झड़प की खबरों के बाद पुलिस-प्रशासन के सामने अब कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। छात्र आंदोलन को लेकर प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हों और किसी भी पक्ष के बीच हिंसक स्थिति न बने। पुलिस घटनाओं से जुड़े वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध सबूतों की मदद से पूरे मामले की जांच कर सकती है। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि विवाद की शुरुआत कैसे हुई और झड़प के लिए कौन जिम्मेदार था।

आगे क्या होगा?

JPSC-JSSC से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का आंदोलन अब राज्य के कई हिस्सों तक पहुंच चुका है। शुक्रवार की घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है। एक तरफ छात्र भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार और प्रशासन के सामने आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की जिम्मेदारी है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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