दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी एक बार फिर हिंसा की खबरों से चर्चा में है। रविवार देर रात कैंपस में वामपंथी छात्र संगठनों और ABVP के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झड़प हुई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला करने का आरोप लगाया है। पत्थरबाजी और मारपीट में 10 से ज्यादा छात्रों के घायल होने की बात सामने आई है। कुछ छात्रों के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं।
इस पूरे विवाद की जड़ विश्वविद्यालय की कुलगुरु का हालिया इंटरव्यू बताया जा रहा है। 16 फरवरी 2026 को जारी एक पॉडकास्ट में उन्होंने यूजीसी के इक्विटी नियमों पर बात करते हुए कहा था कि कोई भी समुदाय हमेशा खुद को ‘पीड़ित’ बताकर आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने दलित और अश्वेत समुदायों का उदाहरण दिया।
उनके इस बयान को कई छात्र संगठनों ने ‘जातिवादी’ और ‘अपमानजनक’ बताया। SFI, AISA और JNU छात्रसंघ ने इसे संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताया और कुलगुरु के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी। पिछले एक हफ्ते से कैंपस में विरोध प्रदर्शन चल रहे थे।
रविवार रात छात्रसंघ की ओर से ‘समता जुलूस’ निकाला गया। यह मार्च साबरमती ढाबे से कुलगुरु आवास की ओर जा रहा था। लेफ्ट संगठनों का आरोप है कि उनका मार्च शांतिपूर्ण था, लेकिन रास्ते में ABVP के कार्यकर्ताओं ने पथराव और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
वहीं ABVP का कहना है कि लेफ्ट समर्थकों ने लाइब्रेरी और स्टडी रूम में पढ़ रहे छात्रों को निशाना बनाया। उनका दावा है कि कुछ छात्र नकाब पहनकर आए थे और उन्होंने अचानक हमला किया। करीब रात 1:30 बजे साबरमती ढाबे और लाइब्रेरी के पास दोनों गुट आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते बहस मारपीट में बदल गई।
कुछ छात्रों का कहना है कि हमलावरों के पास बेल्ट, डंडे और ईंट-पत्थर थे। आरोप यह भी है कि कुछ लोगों के पास धारदार चीजें थीं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कई छात्र अपनी जान बचाने के लिए झाड़ियों, हॉस्टल और कैंपस के अलग-अलग हिस्सों में छिप गए।
ABVP से जुड़े छात्रों का आरोप है कि उन्हें घेरकर पीटा गया। उनका कहना है कि करीब 150 से 400 नकाबपोश लोगों की भीड़ ने हमला किया। वहीं लेफ्ट समर्थकों का कहना है कि उन पर पहले हमला हुआ और वे केवल अपना बचाव कर रहे थे।
घटना में घायल छात्रों को इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
दिल्ली पुलिस कैंपस के बाहर मौजूद थी, लेकिन विश्वविद्यालय की स्वायत्तता के नियमों के कारण प्रशासन की अनुमति के बिना अंदर नहीं जा सकी। आरोप है कि सुरक्षा कर्मियों ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए।
ABVP के मीडिया संयोजक विजय जायसवाल ने कहा कि हमला पहले से तय था और घंटों तक छात्रों को बंधक बनाया गया। उन्होंने प्रशासन से दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
वहीं जेएनयू छात्रसंघ के पदाधिकारी वैभव मीणा ने कहा कि लेफ्ट संगठनों का विरोध जारी था, लेकिन एबीवीपी ने माहौल बिगाड़ा। उन्होंने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
घटना के बाद कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था, रात की निगरानी और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है।
शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित दिल्ली स्थित JNU की पहली महिला कुलगुरु हैं। उन्होंने फरवरी 2022 में यह पद संभाला। वे खुद भी JNU की पूर्व छात्रा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंध और राजनीति विज्ञान उनका प्रमुख अध्ययन क्षेत्र रहा है। अकादमिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ वे लंबे समय से विश्वविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा से जुड़ी रही हैं।
अपने कार्यकाल के दौरान वे कई बार अपने बयानों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर विवादों में आईं। कुछ छात्र संगठन उन्हें दक्षिणपंथी विचारधारा के करीब मानते हैं। इसी वजह से कैंपस के वामपंथी छात्र संगठनों के साथ उनका टकराव अक्सर देखने को मिलता है।