New Year 2026:जनवरी से शुरू नहीं होता था साल, कब और क्यों बदला गया कैलेंडर

क्या आप जानते हैं कि नया साल हमेशा जनवरी से शुरू नहीं होता था? कभी साल सिर्फ 10 महीनों का होता था और मार्च से इसकी शुरुआत होती थी। बाद में एक बड़े फैसले ने कैलेंडर की पूरी व्यवस्था बदल दी।
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जनवरी से शुरू नहीं होता था साल, कब और क्यों बदला गया कैलेंडर
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नया साल शुरू होने वाला है और हर कोई जनवरी के स्वागत की तैयारी में है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि साल की शुरुआत हमेशा से जनवरी से ही क्यों होती है? क्या 12 महीने शुरू से ही थे? और आखिर महीनों के नाम किस आधार पर रखे गए? आपको जानकर हैरानी होगी कि कभी साल में 12 नहीं, बल्कि सिर्फ 10 महीने हुआ करते थे।

    मार्च से होती थी साल की शुरुआत

    आज हम जिस कैलेंडर का इस्तेमाल करते हैं, वह हमेशा ऐसा नहीं था। कई सदियों पहले साल की शुरुआत जनवरी से नहीं, बल्कि मार्च महीने से मानी जाती थी। उस समय मार्च पहला महीना होता था और दिसंबर साल का आखिरी महीना। रोमन कैलेंडर के शुरुआती दौर में साल में सिर्फ 10 महीने होते थे। माना जाता है कि उस समय एक साल में करीब 310 दिन ही गिने जाते थे। इसी वजह से सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के नाम आज भी अंकों से जुड़े हुए लगते हैं।

    क्यों जोड़े गए जनवरी और फरवरी?

    रोमन राजा नुमा पोम्पिलियस ने लगभग 713 ईसा पूर्व में कैलेंडर में बड़ा बदलाव किया। उन्होंने दो नए महीने जोड़े  जनवरी और फरवरी। फरवरी को सबसे आखिर में जोड़ा गया था, इसलिए इसे कम दिन मिले। यही वजह है कि आज भी फरवरी में 28 दिन होते हैं और लीप ईयर में 29। हालांकि, इस बदलाव के बाद भी कई धार्मिक और पारंपरिक कैलेंडर आज तक मार्च से ही शुरू होते हैं।

    जनवरी क्यों बना साल का पहला महीना?

    मार्च का नाम रोमन युद्ध देवता मार्स के नाम पर रखा गया था। लेकिन राजा नुमा ने साल की शुरुआत युद्ध के देवता से नहीं, बल्कि शुरुआत के देवता से करने का फैसला लिया।

    जनवरी का नाम रोमन देवता जेनस (Janus) के नाम पर पड़ा। मान्यता है कि जेनस के दो चेहरे होते थे  एक अतीत की ओर देखता था और दूसरा भविष्य की ओर। इसी सोच के साथ जनवरी को नए साल की शुरुआत का प्रतीक माना गया।

    कैसे पड़े 12 महीनों के नाम

    • जनवरी- रोमन देवता जेनस के नाम पर, जो शुरुआत और अंत के देवता माने जाते हैं।
    • फरवरी- रोमन त्योहार फेब्रुआ के नाम पर, जो आत्म-शुद्धि से जुड़ा था।
    • मार्च- युद्ध के देवता मार्स के नाम पर, पहले यह साल का पहला महीना था।
    • अप्रैल- लैटिन शब्द Aperire से लिया गया, जिसका मतलब होता है “खिलना”।
    • मई- ग्रीक देवी माया, जिन्हें पृथ्वी और उर्वरता की देवी माना जाता था।
    • जून- रोमन देवी जूनो के नाम पर, जो विवाह और परिवार की देवी थीं।
    • जुलाई- रोमन शासक जूलियस सीज़र के सम्मान में, पहले इसे क्विन्टिलिस कहा जाता था।
    • अगस्त- सम्राट ऑगस्टस सीज़र के नाम पर रखा गया।
    • सितंबर- लैटिन शब्द सेप्टेम यानी सात से निकला, क्योंकि यह सातवां महीना था
    • अक्टूबर- ऑक्टा यानी आठ से बना।
    • नवंबर- नोवेम यानी नौ से जुड़ा नाम।
    • दिसंबर- डेका यानी दस से बना, क्योंकि यह दसवां महीना था।

    ग्रेगोरियन कैलेंडर कैसे बना दुनिया का मानक?

    आज दुनिया के 150 से ज्यादा देश ग्रेगोरियन कैलेंडर का इस्तेमाल करते हैं। 1582 में पोप ग्रेगरी ने इसमें सुधार किया, लेकिन मूल ढांचा रोमन और जूलियन कैलेंडर से ही लिया गया। जूलियस सीजर ने 46 ईसा पूर्व में 365 दिनों का साल और हर चार साल में लीप ईयर की व्यवस्था की थी। इसी सिस्टम ने जनवरी और फरवरी को स्थायी रूप से पहले दो महीने बना दिया।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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