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Valentine's day special :ट्रांसमैन जर्नलिस्ट विश्वनाथ का प्रेम बना सबसे बड़ी ताकत

देश के पहले ट्रांसमैन  जर्नलिस्ट विश्वनाथ मैथिल की कहानी एक ऐसे व्यक्ति की, जिन्होंने प्रेम के सहारे अपनी पहचान को स्वीकारा और उसे जीने का साहस पाया। उनके जीवन में आई साथी ने उन्हें हर कदम पर साथ दिया और आज वे दोनों एकसाथ रहकर खुश हैं।
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ट्रांसमैन जर्नलिस्ट विश्वनाथ का प्रेम बना सबसे बड़ी ताकत
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अर्पण राऊत ’ ग्वालियर।विश्वनाथ का जन्म एक महिला के शरीर के रूप में हुआ था। बचपन से ही उनका स्वभाव, हाव-भाव और जीवनशैली पारंपरिक स्त्री पहचान से अलग थी। भीतर से वे स्वयं को पुरुष महसूस करते थे। जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, शरीर में हार्मोनल बदलाव शुरू हुए, वैसे-वैसे उनकी मानसिक पीड़ा भी गहराती गई। वे बताते हैं कि अपने ही शरीर में असहज होना सबसे बड़ा संघर्ष होता है।

    प्रेम बना संबल

    करीब दस वर्ष पहले कॉलेज के दिनों में उनकी जिंदगी में डॉली आर्इं। दोस्ती धीरे-धीरे गहरे विश्वास में बदली। डॉली ने केवल एक मित्र की तरह नहीं, बल्कि एक हमदर्द की तरह उनकी भावनाओं को समझा। जब विश्वनाथ ने जेंडर परिवर्तन का निर्णय लिया, तब यह आसान फैसला नहीं था। मानसिक, सामाजिक और शारीरिक चुनौतियों से भरी इस प्रक्रिया में डॉली हर कदम पर उनके साथ रहीं। दर्दभरी थेरेपी की कई सिटिंग्स और सर्जरी के लंबे दौर के बाद विश्वनाथ ने अपना जेंडर परिवर्तन पूरा किया।

    दस साल का साथ, विवाह में बदला

    दस वर्षों की दोस्ती और अटूट विश्वास ने अंतत: विवाह का रूप लिया। पिछले वर्ष 13 फरवरी को दोनों ने विवाह कर अपने रिश्ते को सामाजिक मान्यता दी। आज वे एक खुशहाल जीवन जी रहे हैं।

    प्रतिभा के धनी विश्वनाथ

    विश्वनाथ बचपन से ही रचनात्मक प्रवृत्ति के रहे हैं। उन्होंने एलजीबीटी समुदाय के लिए जागरुकता फैलाने का निर्णय लिया। पत्रकारिता के साथ-साथ वे ज्योतिष में भी रुचि रखते हैं और फेस रीडर तथा न्यूमेरोलॉजिस्ट के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। आज उनके क्लाइंट देशभर में हैं। विश्वनाथ कहते हैं कि जब समझा कि मैं महिला नहीं, पुरुष हूं, तो प्रक्रिया के जरिए जेंडर बदला। इस दौरान मेरी दोस्त ने मेरा साथ दिया। आज हम दोनों शादी कर खुश हैं। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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