जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन किया तो क्या होगा? जानिए गिरफ्तारी से लेकर जेल तक के कानूनी प्रावधान

दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समूहों के विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। लेकिन अब इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। ऐसे में यहां बिना अनुमति धरना देने, नारेबाजी करने या भीड़ जुटाने पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है। हालिया घटनाक्रम में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। दिल्ली पुलिस ने उन्हें प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में हिरासत में लिया। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई संगठन या व्यक्ति जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचता है, तो उसके खिलाफ कौन-से कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं और सजा कितनी हो सकती है?
जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। इसके स्थान पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD मैदान जैसे वैकल्पिक स्थलों की पहचान की गई है। अब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए केवल वहां पहुंच जाना पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित प्रशासनिक आदेशों और पुलिस की अनुमति का पालन करना जरूरी है। पहले भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त से पहले से लिखित अनुमति लेना जरूरी था। अनुमति में प्रदर्शनकारियों की संख्या, समय और आयोजन से जुड़ी शर्तें तय की जा सकती थीं। अब इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद बिना अनुमति यहां धरना या प्रदर्शन करना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
धारा 163 के तहत भीड़ जुटाने पर रोक
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत सक्षम मजिस्ट्रेट तत्काल खतरे, सार्वजनिक शांति भंग होने या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर सकता है। ऐसे आदेश में सार्वजनिक जमावड़े, जुलूस, प्रदर्शन या कुछ गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है। दिल्ली के नई दिल्ली जिले में अलग-अलग मौकों पर इसी धारा के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। यदि किसी क्षेत्र में लागू आदेश के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है, तो बिना अनुमति ऐसा जमावड़ा करना आदेश का उल्लंघन हो सकता है। पुलिस लोगों को वहां से हटने का निर्देश दे सकती है। आदेश नहीं मानने पर उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है और परिस्थितियों के अनुसार आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि धारा 163 हर जगह अपने आप लागू नहीं हो जाती। यह देखना जरूरी है कि संबंधित स्थान पर किस तरह का आदेश लागू है, उसकी अवधि क्या है और उसमें किन गतिविधियों पर रोक लगाई गई है।
सरकारी आदेश नहीं माना तो BNS की धारा 223 के तहत कार्रवाई
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 सरकारी अधिकारी की ओर से जारी वैध आदेश की अवज्ञा से संबंधित है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसे आदेश का उल्लंघन करता है और कानून में निर्धारित परिस्थितियां बनती हैं, तो उसके खिलाफ इस धारा के तहत मामला दर्ज हो सकता है। इस अपराध में परिस्थितियों के आधार पर एक महीने तक की कैद या जुर्माना हो सकता है। यदि अवज्ञा से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा पैदा होने अथवा दंगा या झड़प होने का जोखिम हो, तो सजा छह महीने तक की कैद और अधिक जुर्माने तक जा सकती है। अदालत मामले के तथ्यों और कानून में निर्धारित शर्तों के आधार पर निर्णय लेती है। इसलिए बिना अनुमति प्रदर्शन करने के हर मामले में एक जैसी सजा तय नहीं होती। कार्रवाई लागू आदेश, उल्लंघन की प्रकृति और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
गैरकानूनी जमावड़े पर BNS की धारा 189
यदि पांच या उससे अधिक लोग कानून में निर्धारित गैरकानूनी उद्देश्य से एकत्र होते हैं, तो परिस्थितियों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता की धारा 189 के प्रावधान लागू हो सकते हैं। इसमें केवल लोगों की संख्या ही नहीं बल्कि जमावड़े का उद्देश्य और कानून में बताई गई दूसरी शर्तें भी महत्वपूर्ण होती हैं। गैरकानूनी जमावड़े में शामिल होने पर छह महीने तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान हो सकता है। यदि ऐसे जमावड़े में घातक हथियार हों या हिंसा, सरकारी काम में बाधा अथवा अन्य अपराध किए जाएं, तो अतिरिक्त कानूनी धाराएं भी लागू हो सकती हैं। ऐसे मामलों में संभावित सजा संबंधित अपराध और उसकी कानूनी शर्तों के अनुसार तय होगी।
पुलिस से भिड़ने या सरकारी काम में बाधा डालने पर बढ़ सकती है मुश्किल
यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिस या अन्य सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डाली जाती है, तो मामले के तथ्यों के आधार पर अलग-अलग धाराएं लागू हो सकती हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 221 लोक सेवक को उसके सार्वजनिक कर्तव्य के निर्वहन से रोकने से संबंधित है। इसके तहत तीन महीने तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला किया जाता है, बल प्रयोग होता है, बैरिकेड तोड़े जाते हैं या किसी अन्य अपराध को अंजाम दिया जाता है, तो संबंधित कृत्य के अनुसार अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। ऐसे मामलों में केवल प्रतिबंधात्मक आदेश के उल्लंघन तक कार्रवाई सीमित रहना जरूरी नहीं है।
सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर अलग कानून
प्रदर्शन के दौरान बसों, बैरिकेड्स या अन्य सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है। इस कानून में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के अपराध के लिए पांच साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। सजा मामले की परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार तय होती है। संपत्ति को नुकसान पहुंचने की स्थिति में कानून के अनुसार जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। नुकसान की भरपाई के संबंध में भी लागू कानूनी प्रक्रिया के तहत कदम उठाए जा सकते हैं।
पुलिस हिरासत में लेने के बाद क्या होता है?
यदि कोई समूह प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति प्रदर्शन करता है, तो पुलिस उसे वहां से हटने के लिए कह सकती है। स्थिति के अनुसार प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर किसी दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। इसके बाद उन्हें छोड़ना है या उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई करनी है, यह मामले की गंभीरता, उपलब्ध तथ्यों और लागू कानून पर निर्भर करता है। यदि हिंसा, सरकारी काम में बाधा, संपत्ति को नुकसान या किसी अन्य अपराध के आरोप हों, तो आयोजकों और संबंधित लोगों के खिलाफ अलग से कार्रवाई हो सकती है। भविष्य में किसी संगठन को प्रदर्शन की अनुमति देने पर भी उसके पिछले आयोजनों और नियमों के पालन को ध्यान में रखा जा सकता है लेकिन अनुमति देने या न देने का निर्णय लागू नियमों और संबंधित अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र के अनुसार होगा।
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शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार खत्म
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का अर्थ यह नहीं है कि देश में शांतिपूर्ण विरोध का संवैधानिक अधिकार पूरी तरह समाप्त हो गया है। संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण ढंग से बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देते हैं। हालांकि इन अधिकारों पर सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा जैसे कारणों से कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।




















