श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन में दो पाकिस्तानी आतंकियों समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह मॉड्यूल लंबे समय से घाटी में सक्रिय था और आतंकियों को लॉजिस्टिक और आर्थिक मदद पहुंचाने का काम कर रहा था। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के तार कश्मीर के अलावा देश के अन्य हिस्सों से भी जुड़े हुए थे।
गिरफ्तार किए गए आतंकियों में एक पाकिस्तानी आतंकी की पहचान अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरेरा के रूप में हुई है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह पिछले करीब 16 वर्षों से फरार चल रहा था और भारत में छिपकर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश में शामिल था।
वहीं दूसरे पाकिस्तानी आतंकी की पहचान उस्मान उर्फ खुबैब के रूप में हुई है। दोनों आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के सक्रिय सदस्य बताए जा रहे हैं और घाटी में आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने में लगे हुए थे। अधिकारियों के अनुसार, इन आतंकियों ने करीब 2010 के आसपास भारत में घुसपैठ की थी और तब से कश्मीर घाटी के अलग-अलग जिलों में सक्रिय रहे।
इस मामले में पुलिस ने श्रीनगर के तीन स्थानीय लोगों को भी गिरफ्तार किया है, जो आतंकियों की मदद कर रहे थे। गिरफ्तार किए गए मददगारों में शामिल हैं-
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि, ये तीनों लोग आतंकियों को पनाह देने, खाने-पीने की व्यवस्था करने और अन्य जरूरी लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने में शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया है कि, ये मददगार सीमा पार बैठे आतंकी हैंडलर्स के संपर्क में थे और उनके निर्देशों पर काम कर रहे थे।
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इस आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया। अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और हरियाणा समेत कुल 19 जगहों पर छापेमारी की गई। सर्च ऑपरेशन के दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामग्री भी बरामद की गई है। इन सबकी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा के OGW (Over Ground Worker) नेटवर्क को भी पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है। OGW वे लोग होते हैं जो सीधे हथियार नहीं उठाते, लेकिन आतंकियों को छिपने की जगह, पैसे, हथियार और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराते हैं। अधिकारियों का कहना है कि, यह नेटवर्क लंबे समय से घाटी में सक्रिय था और आतंकियों की गतिविधियों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था।
जांच के दौरान इस आतंकी मॉड्यूल के तार पंजाब से जुड़े होने के संकेत भी मिले हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क को किन लोगों और किन स्रोतों से समर्थन मिल रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि, इस नेटवर्क के जरिए आतंकियों को फर्जी दस्तावेज और पहचान पत्र उपलब्ध कराए जाते थे। इनकी मदद से कुछ आतंकियों ने देश से बाहर निकलने की कोशिश भी की थी।
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सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी आतंकियों ने पिछले कई वर्षों में घाटी में सक्रिय करीब 40 आतंकवादियों को कमांड किया था। हालांकि, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में इनमें से ज्यादातर आतंकियों को पहले ही मार गिराया जा चुका है। इसके बावजूद यह नेटवर्क लगातार नए आतंकियों को समर्थन और संसाधन उपलब्ध कराता रहा।
अधिकारियों का मानना है कि, इस कार्रवाई से घाटी में एक संभावित बड़े आतंकी हमले की साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां अब गिरफ्तार किए गए आतंकियों और उनके मददगारों से पूछताछ कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। इसके अलावा, यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस मॉड्यूल का संबंध देश के अन्य हिस्सों में सक्रिय आतंकी नेटवर्क से भी था।
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। जांच एजेंसियां डिजिटल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और अन्य सुरागों के आधार पर नेटवर्क के बाकी सदस्यों की पहचान करने की कोशिश कर रही हैं।