कोच्चि वाटर मेट्रो: जलमार्ग से परिवहन की नई क्रांति, 2023 में शुरू हुई थी सेवा

मयंक तिवारी, कोच्चि। कोच्चि वाटर मेट्रो भारत में शहरी परिवहन का एक अभिनव और पर्यावरण-अनुकूल मॉडल बनकर उभर रही है। आधुनिक फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रिक नावों और तेज यात्रा सुविधा के कारण यह परियोजना शहर के लोगों के लिए समय की बचत और सुरक्षित सफर का बेहतर विकल्प साबित हो रही है। आने वाले वर्षों में इसके विस्तार से कोच्चि और आसपास के क्षेत्रों में जलमार्ग आधारित परिवहन को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
आधुनिक तकनीक और फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म की खासियत
कोच्चि वॉटर रेल लिमिटेड द्वारा संचालित यह परियोजना वर्तमान में 10 परिचालन स्टेशनों के साथ 20 इलेक्ट्रिक नावों का संचालन कर रही है। इन नावों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पूरी तरह इलेक्ट्रिक हैं, जो लगभग 20 मिनट में चार्ज होकर करीब 2 घंटे तक लगातार चल सकती हैं।
इस परियोजना का सबसे अनोखा तकनीकी पहलू इसके फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म हैं। इन प्लेटफॉर्मों को थर्माकोल और सीमेंट के विशेष मिश्रण से बनाया गया है, जो हल्का होने के साथ बेहद मजबूत भी होता है। फ्लोटिंग टैक्निक की वजह से ये प्लेटफॉर्म पानी के स्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव के साथ खुद ही ऊपर-नीचे होते रहते हैं, जिससे यात्रियों को नाव में चढ़ने और उतरने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती।
तेज और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन
वाटर मेट्रो की नावें न केवल तेज हैं बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित हैं। पारंपरिक डीजल नावों की तुलना में इनमें ईंधन रिसाव और पॉल्यूशन का खतरा नहीं होता। हर नाव में लगभग 100 यात्री एक साथ यात्रा कर सकते हैं। इस सेवा का सबसे बड़ा लाभ समय की बचत है। जिन रास्तों पर सड़क मार्ग से पहुंचने में करीब एक घंटा लग जाता था, वहीं वाटर मेट्रो के जरिए वही दूरी मात्र 20 मिनट में तय की जा सकती है। यही कारण है कि यह सेवा तेजी से लोकप्रिय हो रही है। रोजाना करीब 6 से 7 हजार यात्री इसका उपयोग करते हैं, जबकि सत्ताह भर पर यह संख्या बढ़कर 12 से 13 हजार तक पहुंच जाती है।
2035 तक बड़ा विस्तार लक्ष्य
इस परियोजना के विस्तार की योजना भी काफी महत्वाकांक्षी है। केएमआरएल के प्रबंध निदेशक लोकनाथ बेहरा के नेतृत्व में 2035 तक कुल 38 स्टेशनों का नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे कोच्चि शहर के साथ-साथ आसपास के द्वीपीय क्षेत्रों को भी जलमार्ग के जरिए जोड़ा जाएगा, जिससे शहर का परिवहन और अधिक सुगम और प्रभावी हो सकेगा।





















