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किसान का नवाचार :ऐसा पंप बनाया जिससे पानी ज्यादा मिलेगा, बिजली की होगी बचत

इंदौर जिले के हरसौला गांव के एक किसान ने वॉटर पंप में ऐसा तकनीकी बदलाव किया है, जिससे कम समय में ज्यादा पानी मिलेगा और बिजली की बचत भी होगी। यह संभव हुआ है पंप के अंदर लगे इम्पेलर के डिजाइन में बदलाव से।
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ऐसा पंप बनाया जिससे पानी ज्यादा मिलेगा, बिजली की होगी बचत
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रभा उपाध्याय, इंदौर। जिले के हरसौला गांव के 45 वर्षीय किसान रामचंद्र पाटीदार ने एक ऐसा पंप विकसित किया है, जो सामान्य पंप की तुलना में कम बिजली खपत में अधिक पानी दे सकता है। किसान ने पंप के अंदर लगे इम्पेलर के डिजाइन में बदलाव के बाद यह संभव हो सका है। इस प्रोटोटाइप को तैयार करने में एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च का सहयोग मिला। पाटीदार ने बताया कि पंप के परीक्षण के लिए एक नामी कंपनी का 5.5 एचपी का पंप लिया गया, जिसकी तुलना उनके 4.8 एचपी पंप से की गई। उनका दावा है कि कंपनी के पंप की तुलना में उनके पंप से प्रति मिनट 10 से 15 लीटर अधिक पानी प्राप्त हुआ। वहीं करीब 7 से 8 प्रतिशत तक बिजली की बचत हो सकती है।

    इम्पेलर डिजाइन में किया बदलाव 

    पाटीदार बताते हैं, पंप के अंदर पानी को प्रवाहित करने वाले मुख्य हिस्से इम्पेलर के डिजाइन में मामूली बदलाव कर उसकी कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है। पंप के प्रदर्शन की जांच के लिए लोकल लैब में परीक्षण भी कराया गया, जिसमें बिजली की खपत और पानी के प्रवाह जैसे तकनीकी मानकों का आकलन किया गया है।

    35-40 साल का अनुभव  

    पाटीदार पिछले करीब 35-40 वर्षों से खेती और मैकेनिकल रिपेयरिंग के काम से जुड़े हैं। इसी दौरान पंप की कार्यप्रणाली को समझते हुए उन्होंने कई प्रयोग किए और अंतत: यह मॉडल तैयार किया। उन्होंने केवल हायर सेकंडरी तक पढ़ाई की है, लेकिन उनका मानना है कि अनुभव और लगातार प्रयोग से नई तकनीक विकसित की जा सकती है।

    ऐसे आगे बढ़ा प्रोजेक्ट

    • 2018 में इस पर काम शुरू किया
    • 2021-22 में पेटेंट फाइल किया
    • 2023 में पेटेंट ग्रांट हो गया
    • प्रोटोटाइप बनाने में करीब 11-12 लाख रुपए खर्च हुए

    कंपनियां या सरकार अपनाए तकनीक

    यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर विकसित कर कंपनियों या सरकार द्वारा अपनाया जाए, तो किसानों की सिंचाई लागत कम होने के साथ बिजली की बचत भी संभव है।

    प्रो. सचिन मित्तल, एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च, इंदौर

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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