प्रभा उपाध्याय, इंदौर। जिले के हरसौला गांव के 45 वर्षीय किसान रामचंद्र पाटीदार ने एक ऐसा पंप विकसित किया है, जो सामान्य पंप की तुलना में कम बिजली खपत में अधिक पानी दे सकता है। किसान ने पंप के अंदर लगे इम्पेलर के डिजाइन में बदलाव के बाद यह संभव हो सका है। इस प्रोटोटाइप को तैयार करने में एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च का सहयोग मिला।
पाटीदार बताते हैं, पंप के अंदर पानी को प्रवाहित करने वाले मुख्य हिस्से इम्पेलर के डिजाइन में मामूली बदलाव कर उसकी कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है। पंप के प्रदर्शन की जांच के लिए लोकल लैब में परीक्षण भी कराया गया, जिसमें बिजली की खपत और पानी के प्रवाह जैसे तकनीकी मानकों का आकलन किया गया है।
पाटीदार पिछले करीब 35-40 वर्षों से खेती और मैकेनिकल रिपेयरिंग के काम से जुड़े हैं। इसी दौरान पंप की कार्यप्रणाली को समझते हुए उन्होंने कई प्रयोग किए और अंतत: यह मॉडल तैयार किया। उन्होंने केवल हायर सेकंडरी तक पढ़ाई की है, लेकिन उनका मानना है कि अनुभव और लगातार प्रयोग से नई तकनीक विकसित की जा सकती है।
यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर विकसित कर कंपनियों या सरकार द्वारा अपनाया जाए, तो किसानों की सिंचाई लागत कम होने के साथ बिजली की बचत भी संभव है।
प्रो. सचिन मित्तल, एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च, इंदौर