‘पेट्रोल-डीजल को हथियार बनाया गया!’ ईरान-अमेरिका तनाव के बीच PM मोदी का बड़ा बयान

नई दिल्ली। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। अपने भाषण में PM मोदी ने दुनिया में चल रहे ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया के तनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में ऊर्जा सुरक्षा देश की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। PM मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने कई बड़े संकट देखे हैं। कोरोना महामारी से लेकर यूक्रेन और पश्चिम एशिया के तनाव तक, इन घटनाओं ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सप्लाई सिस्टम को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में भारत ने पहले से तैयारी की और संकट आने पर यही तैयारी देश के काम आई।
‘पेट्रोल-डीजल को हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया’
PM मोदी ने अपने भाषण में कहा कि पेट्रोल, डीजल और फर्टिलाइजर जैसी जरूरी चीजों को भी हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि तेल और गैस को लेकर लोगों में डर पैदा करने की कोशिश हुई, लेकिन भारत ने पहले से तैयारी कर रखी थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के समय देश अपनी ताकत के दम पर खड़ा रहा। उनके मुताबिक, भारत ने जिन व्यवस्थाओं पर पहले से काम किया था, वे मुश्किल समय में काफी काम आईं। ऊर्जा संकट के बीच भारत ने अपनी सप्लाई को बनाए रखने के लिए अलग-अलग देशों से ऊर्जा आयात के विकल्प बढ़ाए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत अब पहले के मुकाबले ज्यादा देशों से ऊर्जा आयात करता है और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की क्षमता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा क्यों बन गई बड़ी चुनौती?
आज दुनिया की अर्थव्यवस्था काफी हद तक ऊर्जा पर निर्भर है। पेट्रोल-डीजल से लेकर गैस और बिजली तक, लगभग हर क्षेत्र में ऊर्जा की जरूरत होती है। PM मोदी ने कहा कि “एनर्जी के बिना नई दुनिया को चलाना मुश्किल हो गया है।” भारत को आने वाले वर्षों में बड़ी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होगी। ऐसे में देश के लिए केवल ऊर्जा की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षित और लगातार सप्लाई भी बेहद जरूरी है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का कारोबार होता है। संकट के दौरान यहां आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा।
भारत ने पहले से की थी तैयारी
PM मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में दुनिया ने कई बड़े संकटों का सामना किया है। कोरोना के दौरान पूरी दुनिया की व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं। इसके बाद यूक्रेन और पश्चिम एशिया में तनाव ने नई चुनौतियां खड़ी कर दीं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों के बीच भारत ने अपनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी की। सरकार की ओर से भी कहा गया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई को सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठाए गए हैं। भारत ने ऊर्जा आयात के स्रोतों को भी बढ़ाया है, ताकि किसी एक क्षेत्र या देश पर निर्भरता कम की जा सके।
2047 तक 100 GW न्यूक्लियर पावर का लक्ष्य
PM मोदी ने ऊर्जा के भविष्य को लेकर भी बड़ा लक्ष्य सामने रखा। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत ने 100 गीगावाट न्यूक्लियर पावर का लक्ष्य रखा है। इसका मकसद आने वाले वर्षों में देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। भारत लगातार परमाणु ऊर्जा के साथ-साथ सौर ऊर्जा, हरित ऊर्जा और दूसरे विकल्पों पर भी जोर दे रहा है। PM मोदी का कहना है कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पर्याप्त और सुरक्षित ऊर्जा बेहद जरूरी है।
हॉर्मूज को लेकर बढ़ा तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज को लेकर भी स्थिति काफी संवेदनशील रही है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के ऊर्जा कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। संकट के दौरान इस रास्ते से तेल, गैस और अन्य जरूरी सामान की आवाजाही प्रभावित हुई। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर पड़ा। भारत भी इस संकट से पूरी तरह अछूता नहीं है, क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है।
अफवाहों पर भी PM मोदी ने साधा निशाना
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के समय दुनिया में कई तरह की अफवाहें भी फैलाई गईं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को लग रहा था कि भारत इन मुश्किल परिस्थितियों में दबाव में आ जाएगा। लेकिन PM मोदी के मुताबिक, भारत ने अपनी तैयारी और क्षमता के दम पर स्थिति को संभाला।उन्होंने कहा कि देश को अपनी ताकत पर भरोसा रखना चाहिए और संकट के समय आत्मनिर्भरता सबसे बड़ा सहारा बनती है।
पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर सरकार की नजर
पश्चिम एशिया के संकट के दौरान भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल की घरेलू सप्लाई को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया। सरकारी प्रकाशन के मुताबिक, देश में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के साथ तेल कंपनियों के पास मौजूद स्टॉक भी सप्लाई को संभालने में मदद करता है। भारत ने ऊर्जा स्रोतों को अलग-अलग देशों तक फैलाने की रणनीति भी अपनाई है। इसका उद्देश्य किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर देश की ऊर्जा जरूरतों पर बड़ा असर न पड़ने देना है।












