11 साल से अधूरा इटारसी-बैतूल NH :अब सतपुड़ा के जंगल में टाइगर कॉरिडोर पर खर्च होंगे 521 करोड़ रुपए

अशोक गौतम, भोपाल। भूतल परिवहन मंत्रालय ने इटारसी-बैतूल नेशनल हाईवे-46 पर कॉरिडोर बनाने के लिए 758 करोड़ रुपए जारी किए हैं, जिसमें 521 करोड़ रुपए सिर्फ 21 किलोमीटर में तीन कॉरिडोर बनाने पर खर्च होंगे। शेष राशि वनीकरण सहित अन्य कार्यों में खर्च की जाएगी। 21 किमी के टाइगर कॉरिडोर में 10 अंडर पास और एक ओवरपास होगा, जिसमें ऊपर से जानवर कॉडिरोर को क्रॉस करेंगे और नीचे से वाहनों को निकाला जाएगा। वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर को लेकर 11 वर्ष से बन रहा 73 किमी लंबा इटारसी-बैतूल नेशनल हाइवे (एनएच) आज भी अधूरा है। तब इसे फोर लेन बनाने की लागत 589
21 किमी गुजरने में लगते हैं 50 मिनट
इटारसी-बैतूल हाइवे की डीपीआर 2012-13 में बनाई गई थी। इस मार्ग का करीब 21 किमी हिस्सा फॉरेस्ट एरिया से गुजरता है और सिंगल लेन है। इसी हिस्से में टाइगर कॉरिडोर बनाया जाना है। इस हिस्से में हमेशा जाम की स्थिति बनती है। इसे पार करने में वाहन चालकों को 15 मिनट की जगह 50 मिनट का समय लगता है।
2015 में वन विभाग ने लगाई थी रोक
इस हाइवे को बनाने की शुरुआत एनएचएआई ने वर्ष 2014-15 में की थी। इस दौरान बैतूल के एक एक्टिविस्ट ने नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड (एनडब्ल्यूबी) में शिकायत की, इसमें कहा गया था कि केसला, भौरा और बरेठा क्षेत्र टाइगर कॉरिडोर है। इसी को आधार बनाते हुए कुछ एक्टिविस्टों ने हाईकोर्ट जबलपुर में पीआईएल लगा दी। अब एनडब्ल्यूबी ने एनएचएआई को कुछ शर्तें लगाते हुए एनिमल अंडर पास बनाने के साथ रोड चौड़ीकरण की अनुमति दी है। एनएचएआई अब 7 अप्रैल को हाईकोर्ट में होने वाली फाइनल सुनवाई में पक्ष रखेगा।
केसला, भौंरा और बरेठा में बनेंगे एनिमल अंडर पास
एनएचएआई केसला, भौरा और बरेठा रेंज में एनिमल अंडर पास बनाएगा। केसला में 1.2 किमी के क्षेत्र में अंडरपास तथा भौरा और बरेठा में 5-5 सौ मीटर के अंडरपास बनाए जाएंगे। यह पूरी तरह से साउंड प्रूफ होगा, जिससे वाहनों की आवाज से वन्यजीवों ्को डिस्टरबेंस न हो।
झांसी रोड होगी फोरलेन
इधर, भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मप्र के निवाड़ी और उप्र के (झांसी) राज्यों में झांसी के लिए 15.5 किमी लंबाई के 4-लेन वाले दक्षिणी बाईपास के निर्माण और बंगाय खास से ओरछा तिगेला तक एनएच-44 और एनएच-39 को जोड़ने वाली लिंक रोड के लिए 631.73 करोड़ की स्वीकृति भी दी है।
यहां पहले से बने हैं ओवर-अंडर पास
राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में 12 किमी का ओवर और अंडर पास बनाया गया है। मप्र के नौरादेही टाइगर रिजर्व सहित अधिकांश में ओवर पास और अंडर पास बनाए गए हैं।












