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अंतरिक्ष में मचा हड़कंप !ISS में बढ़ा हवा का रिसाव, नासा ने एस्ट्रोनॉट्स को तुरंत स्पेसक्राफ्ट में जाने का दिया आदेश

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में हवा लीक होने की रफ्तार अचानक बढ़ गई, जिसके बाद नासा ने इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया। एस्ट्रोनॉट्स को स्पेसक्राफ्ट में भेजा गया। आखिर कितना बड़ा था खतरा, पढ़िए पूरी खबर।
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ISS में बढ़ा हवा का रिसाव, नासा ने एस्ट्रोनॉट्स को तुरंत स्पेसक्राफ्ट में जाने का दिया आदेश

पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर मौजूद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में उस समय हड़कंप मच गया, जब वहां हवा के रिसाव की रफ्तार अचानक बढ़ गई। हालात को गंभीर मानते हुए नासा ने तुरंत अलर्ट जारी किया और स्टेशन पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रहने के लिए उनके स्पेसक्राफ्ट में जाने को कहा। हालांकि जांच के बाद पता चला कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, जिसके चलते करीब दो घंटे बाद अलर्ट हटा लिया गया। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि अंतरिक्ष में छोटी सी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़ा खतरा बन सकती है।

हवा का रिसाव बढ़ते ही नासा अलर्ट मोड में

जानकारी के मुताबिक, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के रूसी हिस्से में मौजूद ज्वेज्दा मॉड्यूल में पिछले कई महीनों से हल्का हवा का रिसाव हो रहा था। वैज्ञानिक इस पर लगातार नजर रखे हुए थे, क्योंकि रिसाव बहुत कम था और तत्काल कोई बड़ा खतरा नहीं माना जा रहा था। लेकिन हाल ही में स्थिति तब गंभीर हो गई जब हवा लीक होने की रफ्तार अचानक दोगुनी हो गई। पहले जहां हर दिन करीब एक पाउंड हवा बाहर निकल रही थी, वहीं यह बढ़कर दो पाउंड प्रतिदिन तक पहुंच गई। जैसे ही यह जानकारी मिली, नासा के मिशन कंट्रोल सेंटर ने तुरंत सतर्कता बढ़ा दी और सुरक्षा उपाय शुरू कर दिए। वैज्ञानिकों को चिंता थी कि अगर रिसाव और बढ़ता है तो स्पेस स्टेशन के अंदर हवा का दबाव कम हो सकता है। ऐसी स्थिति में वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है, इसलिए नासा ने कोई जोखिम लेने के बजाय तुरंत कार्रवाई की।

अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेसक्राफ्ट में भेजा गया

नासा की प्रवक्ता बेथानी स्टीवंस के अनुसार, ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल से अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया गया। इसके तहत कई एस्ट्रोनॉट्स को स्टेशन से जुड़े स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन कैप्सूल में भेजा गया। उन्हें अपने स्पेससूट पहनने के लिए भी कहा गया ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत पृथ्वी पर वापस लाया जा सके। इस दौरान सभी अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह अलर्ट मोड में रहे और सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया। करीब दो घंटे तक सभी संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निगरानी की गई। बाद में जब वैज्ञानिकों को लगा कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, तब इमरजेंसी अलर्ट वापस ले लिया गया।

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स्टेशन पर मौजूद हैं सात अंतरिक्ष यात्री

इस समय इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर कुल सात अंतरिक्ष यात्री मौजूद हैं। इनमें नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी के सदस्य शामिल हैं। क्रू-12 मिशन के तहत जेसिका मीर, जैक हैथवे, सोफी एडेनोट और आंद्रेई फेदयेव स्टेशन पर मौजूद हैं। इनके अलावा क्रिस्टोफर विलियम्स, सर्गेई कुद-स्वेरचकोव और सर्गेई मिकायेव भी स्टेशन पर कार्य कर रहे हैं। घटना के दौरान सभी यात्रियों को सुरक्षा संबंधी निर्देश जारी किए गए और लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखी गई।

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रूसी मॉड्यूल में पहले भी सामने आ चुकी है समस्या

जिस ज्वेज्दा मॉड्यूल में यह समस्या सामने आई है, वह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक माना जाता है। यह मॉड्यूल स्टेशन के संचालन और रहने की सुविधाओं से जुड़ा हुआ है। पिछले कुछ समय से इस हिस्से में छोटे-छोटे एयर लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं। इन्हें लेकर नासा और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के वैज्ञानिक लगातार अध्ययन कर रहे हैं। हालांकि अब तक इस रिसाव का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। 

रूसी और अमेरिकी टीम के बीच दिखा अलग नजरिया

घटना के दौरान एक दिलचस्प स्थिति भी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, जब नासा अपने यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर भेज रहा था, उसी समय रूसी अंतरिक्ष यात्री रिसाव के स्रोत का पता लगाने में जुटे हुए थे। बताया गया कि सर्गेई कुद-स्वेरचकोव और सर्गेई मिकायेव संभावित दरार की जांच कर रहे थे। इस दौरान रिसाव की सही जगह खोजने के लिए अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। नासा के अधिकारियों ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पहले यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का फैसला किया, जबकि रूसी टीम समस्या की जड़ तक पहुंचने की कोशिश में लगी रही।

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27 साल के इतिहास में बेहद दुर्लभ घटना

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का इतिहास लगभग 27 साल पुराना है और इतने लंबे समय में बहुत कम मौकों पर इस तरह की इमरजेंसी स्थिति बनी है। आमतौर पर स्टेशन पर सुरक्षा अलर्ट तब जारी किए जाते हैं जब अंतरिक्ष का कोई मलबा स्टेशन के बेहद करीब से गुजरने वाला हो या दबाव में असामान्य बदलाव दर्ज किया जाए। अच्छी बात यह है कि अब तक किसी भी आपातकालीन स्थिति में पूरे स्पेस स्टेशन को खाली कराने की नौबत नहीं आई है। इस बार भी स्थिति पर तेजी से नियंत्रण पा लिया गया और सभी अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रहे।

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आखिर क्या है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS)?

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन यानी ISS पृथ्वी के चारों ओर घूमने वाली एक बड़ी अंतरिक्ष लैब है। यहां अलग-अलग देशों के अंतरिक्ष यात्री कई महीनों तक रहकर विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े प्रयोग करते हैं। यह स्पेस स्टेशन करीब 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा करता है और लगभग 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा कर लेता है। इसे अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान और कनाडा समेत दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों ने मिलकर बनाया है। ISS का पहला हिस्सा साल 1998 में अंतरिक्ष में भेजा गया था। तब से यह अंतरिक्ष अनुसंधान का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। यहां वैज्ञानिक ऐसे प्रयोग करते हैं, जो पृथ्वी पर करना संभव नहीं होता। हाल ही में सामने आई हवा के रिसाव की घटना ने दिखाया कि अंतरिक्ष में छोटी सी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़ी चिंता का कारण बन सकती है। हालांकि, नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों की सतर्कता के कारण स्थिति को समय रहते संभाल लिया गया।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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