मिडिल-ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू गुरुवार रात कैमरे के सामने आए और एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दुनिया को बड़ा संदेश दिया। लगभग तीन हफ्तों से जारी युद्ध के दौरान उन्होंने पहली बार अंग्रेजी में सीधे देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि, इजरायल और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई के बाद ईरान की न्यूक्लियर और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा है। इस दौरान नेतन्याहू ने यह भी साफ कर दिया कि, उनके बारे में फैल रही मौत की अफवाहें पूरी तरह झूठी हैं। उन्होंने कहा, मैं जिंदा हूं और आप सब गवाह हैं।
प्रधानमंत्री ने युद्ध के मौजूदा हालात, अमेरिका के साथ साझेदारी, ईरान के खिलाफ सैन्य रणनीति और इजरायली नागरिकों की मुश्किलों पर विस्तार से बात की। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान अब दुनिया को न्यूक्लियर ताकत के दम पर ब्लैकमेल नहीं कर सकता।
युद्ध के बीच सोशल मीडिया पर कई बार यह अफवाह फैली कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू की मौत हो चुकी है। इन अफवाहों पर खुद सामने आकर उन्होंने विराम लगाया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि, सबसे पहले मैं यह साफ कर दूं कि मैं जिंदा हूं। इससे पहले भी एक वीडियो सामने आया था जिसमें वह अमेरिकी राजदूत के साथ बातचीत करते हुए नजर आए थे।
इजरायल और ईरान के बीच युद्ध पिछले करीब 20 दिनों से जारी है। इस दौरान इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों पर लगातार हवाई हमले किए हैं। नेतन्याहू ने दावा किया कि, इन हमलों में ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार अब ईरान के पास न तो यूरेनियम को एनरिच करने की क्षमता बची है और न ही बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की ताकत।
उन्होंने कहा कि, जून में किए गए हमलों में ईरान की कई मिसाइलों और न्यूक्लियर सुविधाओं को पहले ही तबाह कर दिया गया था। अब इजरायल उन फैक्ट्रियों को निशाना बना रहा है जो मिसाइल और परमाणु हथियारों के लिए जरूरी पार्ट्स तैयार करती थीं। नेतन्याहू ने कहा कि, हम इन क्षमताओं को खत्म करने के लिए पूरी ताकत से काम कर रहे हैं। हम उन्हें मिट्टी में मिला देंगे।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेतन्याहू ने इजरायल के नागरिकों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि, देश के लोगों ने युद्ध के दौरान अद्भुत धैर्य और साहस दिखाया है। उन्होंने कहा कि, मेरे भाइयों और बहनों, इजरायल के नागरिकों… मुझे आप पर गर्व है। आपके दृढ़ संकल्प और धैर्य पर गर्व है। प्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि, लगातार हमलों के कारण लोगों को लंबे समय तक सुरक्षित कमरों और बंकरों में रहना पड़ रहा है, जो बेहद कठिन स्थिति है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेतन्याहू ने साफ शब्दों में इजरायल के युद्ध के तीन मुख्य उद्देश्य बताए।
1. न्यूक्लियर खतरे को खत्म करना
इजरायल का पहला लक्ष्य ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह खत्म करना है, ताकि वह भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न कर सके।
2. बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को नष्ट करना
दूसरा लक्ष्य ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करना है। नेतन्याहू का कहना है कि इन मिसाइलों का इस्तेमाल दूर-दराज के देशों पर हमले के लिए किया जा सकता था।
3. ईरानी जनता को आजादी का अवसर देना
तीसरा लक्ष्य ईरान में ऐसे हालात पैदा करना है जिससे वहां के लोग अपनी आजादी को समझ सकें और अपनी किस्मत खुद तय कर सकें।
नेतन्याहू ने कहा कि, पिछले 47 सालों से ईरान का मौजूदा शासन अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध जैसी स्थिति बनाए हुए है।
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नेतन्याहू ने अपने संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि, अमेरिका और इजरायल इस युद्ध में पूरी मजबूती के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक दोनों देशों की साझेदारी ने युद्ध में बड़ी रणनीतिक बढ़त दिलाई है। नेतन्याहू ने कहा कि, राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका और इजरायल बहुत मजबूत इरादे के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, कोई भी यह नहीं सोच सकता कि कोई राष्ट्रपति ट्रंप को यह बताए कि उन्हें क्या करना चाहिए।
नेतन्याहू ने ईरान के बड़े ऊर्जा क्षेत्र साउथ पार्स गैस फील्ड पर हुए हमले को लेकर भी बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि, इस हमले को इजरायल ने अकेले अंजाम दिया था और इसमें अमेरिका सीधे तौर पर शामिल नहीं था। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने उनसे अनुरोध किया था कि ईरान के प्राकृतिक गैस फील्ड पर आगे और हमले न किए जाएं।
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इस युद्ध के दौरान ईरान को सैन्य और राजनीतिक स्तर पर भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की सुप्रीम सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेट्री अली लारिजानी को इजरायली हमले में मार दिया गया। इसके अलावा ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड की बासिज फोर्स के प्रमुख जनरल गुलाम रजा सुलेमानी की भी मौत हो गई। इन दोनों नेताओं की मौत को ईरान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमलों की 61वीं लहर शुरू की है, जिसमें तेल अवीव और अन्य शहरों को निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद इजरायल के कई हिस्सों में सायरन बजने लगे और नागरिकों को सुरक्षित बंकरों में जाने की चेतावनी दी गई।
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युद्ध के बावजूद इजरायल सरकार देश में हालात सामान्य करने की कोशिश कर रही है। नेतन्याहू ने बताया कि, उनकी सरकार लगातार काम कर रही है ताकि स्कूलों को धीरे-धीरे फिर से खोला जा सके और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके। उन्होंने कहा कि युद्ध का असर बच्चों की पढ़ाई, व्यवसाय, बुजुर्गों और रिजर्व सैनिकों पर पड़ रहा है और सरकार इन सभी समस्याओं को समझती है।
ईरान ने कई बार दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी दी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नेतन्याहू ने कहा कि, ऐसी धमकियां काम नहीं करेंगी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि, युद्ध उम्मीद से जल्दी खत्म हो सकता है।