सीजफायर बेअसर!इजरायल का दावा- बेरूत हवाई हमले में हिज्बुल्लाह नेता नईम कासिम के भतीजे को किया ढेर

मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिनों के सीजफायर की घोषणा के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि क्षेत्र में हिंसा कम होगी, लेकिन हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर अपने हमले तेज कर दिए हैं।
बेरुत में टार्गेटेड हमला
इजरायली सेना (आईडीएफ) के अनुसार, बेरुत के तल्लेत खयात इलाके में यह हमला किया गया। यह इलाका हिजबुल्लाह के प्रभाव वाले दाहियेह क्षेत्र के करीब माना जाता है। हमले के दौरान एक बहुमंजिला इमारत आंशिक रूप से ढह गई। सेना का कहना है कि इस हमले का निशाना अली यूसुफ हर्शी था, जो हिजबुल्लाह चीफ नईम कासिम का निजी सचिव और भतीजा था।
आईडीएफ के बयान में कहा गया कि हर्शी संगठन के भीतर बेहद अहम भूमिका निभा रहा था। वह कासिम के दफ्तर के संचालन, रणनीतिक समन्वय और उनकी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा हुआ था। इजरायल का दावा है कि यह हमला पूरी तरह टार्गेटेड था और हिजबुल्लाह के नेतृत्व नेटवर्क को कमजोर करने के उद्देश्य से किया गया।
लेबनान में इजरायल के लगातार हमले
सीजफायर के बावजूद इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ उसके सैन्य अभियान जारी रहेंगे। इजरायल का कहना है कि अमेरिका-ईरान युद्धविराम केवल ईरान तक सीमित है और इसमें लेबनान शामिल नहीं है। इसी वजह से इजरायल हिजबुल्लाह को निशाना बना रहा है, जिसे वह ईरान का प्रमुख प्रॉक्सी संगठन मानता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक 8 अप्रैल से अब तक इजरायली हमलों में 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कई इलाकों में भारी तबाही की खबरें सामने आई हैं। बेरुत और दक्षिणी लेबनान में लगातार हवाई हमले किए जा रहे हैं, जिनमें हथियारों के गोदाम, रॉकेट लॉन्चर और हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
हथियारों के सप्लाई रूट पर भी हमला
इजरायली सेना ने यह भी दावा किया है कि, उसने लिटानी नदी के आसपास दो अहम मार्गों पर हमला किया है। सेना का कहना है कि इन रास्तों का इस्तेमाल हिजबुल्लाह दक्षिणी लेबनान में हथियार, रॉकेट और लॉन्चर पहुंचाने के लिए करता था। इसके अलावा, दक्षिणी लेबनान में करीब 10 हथियार भंडार, लॉन्चिंग साइट्स और संगठन के मुख्यालयों पर भी हमला किया गया है। इजरायल की रणनीति साफ है कि वह हिजबुल्लाह के सैन्य ढांचे और सप्लाई चेन को पूरी तरह कमजोर करना चाहता है।
कौन हैं नईम कासिम?
नईम कासिम हिजबुल्लाह के प्रमुख नेताओं में से एक हैं और लंबे समय तक संगठन के उप-महासचिव रहे। उनका जन्म फरवरी 1953 में लेबनान के दक्षिणी क्षेत्र कफर किला में हुआ था। उन्होंने लेबनानी विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल की और शुरुआती दौर में केमिस्ट्री के शिक्षक के रूप में काम किया। धार्मिक शिक्षा उन्होंने प्रमुख शिया विद्वानों के मार्गदर्शन में प्राप्त की थी।
1982 में जब हिजबुल्लाह की स्थापना हुई, तब नईम कासिम इसके प्रमुख वैचारिक नेताओं में शामिल थे। 1991 में उन्हें संगठन का उप-महासचिव बनाया गया और वह तीन दशकों से ज्यादा समय तक हसन नसरल्लाह के साथ इस पद पर रहे।
सितंबर 2024 में नसरल्लाह की मौत और उसके बाद हाशेम सफीद्दीन के मारे जाने के बाद 29 अक्टूबर 2024 को नईम कासिम को हिजबुल्लाह का नया महासचिव चुना गया। उन्होंने हिजबुल्लाह के इतिहास और विचारधारा पर Hezbollah: The Story from Within नाम की किताब भी लिखी है, जिसका कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
ईरान में बड़े नेताओं की मौत से बढ़ा तनाव
मिडिल ईस्ट में जारी इस संघर्ष के दौरान ईरान में भी कई बड़े नेताओं की मौत की खबरें सामने आई हैं। 28 फरवरी को शुरू हुई जंग के पहले ही दिन हुए एक बड़े हवाई हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद 8 मार्च को उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया।
इसी दौरान ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख अली लारिजानी की भी हत्या कर दी गई। इसके अलावा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ मोहम्मद पाकपूर की मौत की खबर भी सामने आई। इन घटनाओं ने ईरान की सैन्य और राजनीतिक व्यवस्था को गहरा झटका दिया है।
ईरान ने दी चेतावनी
लेबनान पर जारी हमलों को लेकर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर लेबनान पर हमले नहीं रोके गए तो ईरान अमेरिका के साथ हुए सीजफायर समझौते को रद्द कर सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अमेरिका को साफ फैसला करना होगा कि वह युद्धविराम चाहता है या इजरायल के जरिए युद्ध जारी रखना चाहता है। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
नेतृत्व संकट से जूझ रहा हिजबुल्लाह
लगातार हमलों और नेताओं की मौत के बाद हिजबुल्लाह के सामने नेतृत्व संकट गहराता दिखाई दे रहा है। हालांकि, संगठन ने अभी तक अली यूसुफ हर्शी की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन अगर यह दावा सही साबित होता है तो यह हिजबुल्लाह और उसके सहयोगी ईरान के लिए बड़ा झटका होगा।
मिडिल ईस्ट में हालात बेहद संवेदनशील
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में हिंसा और सैन्य गतिविधियां जारी हैं। लेबनान, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे मिडिल ईस्ट को एक बार फिर अस्थिर स्थिति में ला खड़ा किया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है।











