मध्य-पूर्व में हालिया ईरान-इजराइल संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाकर गंभीर नुकसान पहुंचाने का दावा किया था। लेकिन अब अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक रिपोर्ट ने इस पूरे दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के अधिकांश प्रमुख परमाणु ठिकाने तबाह नहीं हुए हैं। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस रिपोर्ट को फर्जी करार देते हुए मीडिया पर भड़काव का आरोप लगाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने X पर पोस्ट कर इन दावों को खारिज किया है। उन्होंने CNN और NYT की खबरों को फेक न्यूज करार दिया है।

अमेरिकी और इजराइली हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म करना था। बंकर बस्टर बमों और मिसाइलों के ज़रिए ईरान के अंडरग्राउंड न्यूक्लियर फैसिलिटीज पर हमले किए गए। प्रारंभिक बयानों में कहा गया था कि ईरान की परमाणु परियोजना अब दशकों पीछे चली गई है। लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि परमाणु संयंत्रों को सीमित नुकसान पहुंचा है, पूर्ण विनाश नहीं हुआ। यूरेनियम संवर्धन की कुछ यूनिट्स अब भी कार्यशील हैं। तकनीकी स्टाफ और वैज्ञानिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। इससे साफ है कि ईरान भविष्य में दोबारा अपने परमाणु कार्यक्रम को शुरू करने में सक्षम रहेगा।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुफिया रिपोर्ट को फेक न्यूज बताते हुए कहा कि यह अमेरिका और उसके सैन्य प्रयासों को कमजोर दिखाने की साजिश है। ट्रंप ने कहा, “ईरान अब कई वर्षों तक परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में नहीं रहेगा। हमारा हमला इतना प्रभावशाली था कि उनका प्रोग्राम दशकों पीछे चला गया है।”
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मीडिया संस्थान जानबूझकर गलत सूचनाएं फैला रहे हैं और अमेरिकी सेना के पराक्रम को कम करके आंक रहे हैं।
ईरान ने हमलों के बाद अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि उनका परमाणु कार्यक्रम स्थायी नहीं रुकेगा। एक ईरानी अधिकारी ने बयान जारी करते हुए कहा, “हम अपने वैज्ञानिकों के साथ मिलकर फिर से अपने परमाणु लक्ष्यों की दिशा में काम शुरू करेंगे। हमला हमें रोक नहीं सकता।”
ईरान ने यह भी कहा है कि वह आत्मरक्षा के अपने अधिकार का उपयोग करते हुए यूरेनियम संवर्धन और संबंधित गतिविधियों को फिरसे प्रारंभ करेगा।