Manisha Dhanwani
19 Jan 2026
तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अमेरिका को साफ चेतावनी दी है कि, अगर देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई पर किसी भी तरह का हमला किया गया, तो उसे पूरे ईरानी राष्ट्र के खिलाफ युद्ध माना जाएगा। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की बात कहकर हालात को और भड़का दिया है।
पजशकियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि, हमारे महान नेता पर कोई भी हमला ईरान के खिलाफ खुली जंग के बराबर होगा और उसका जवाब बेहद कठोर व पछतावे वाला होगा। इस बयान ने पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद अस्थिरता को और गहरा कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि, अब ईरान को नई लीडरशिप की जरूरत है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि, अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं और फांसी जारी रहीं, तो अमेरिका दखल देने पर विचार कर सकता है। ट्रंप के इन बयानों को तेहरान ने सीधे तौर पर संप्रभुता पर हमला माना है।
ट्रंप का दावा है कि, ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन वहां की जनता के गुस्से का नतीजा हैं, जो आर्थिक संकट, राजनीतिक दमन और मानवाधिकार उल्लंघनों से उपजा है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर आरोप लगाया कि वह डर और हिंसा के जरिए सत्ता में बना हुआ है।
ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि, अमानवीय प्रतिबंधों ने ईरानी जनता की कमर तोड़ दी है। तेल निर्यात पर पाबंदियां, बैंकिंग सिस्टम पर रोक और विदेशी निवेश की कमी ने आम लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी है।
ईरान का आरोप है कि, अमेरिका जानबूझकर देश को आर्थिक रूप से कमजोर कर अंदरूनी अशांति को बढ़ावा दे रहा है। यही वजह है कि, सरकार अमेरिका और इजराइल पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा रही है।
ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए हिंसक प्रदर्शन अब तक के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों में गिने जा रहे हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के मुताबिक, अब तक करीब 5,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें लगभग 500 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। वहीं मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि, 3,428 प्रदर्शनकारी मारे गए और 18,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र ने इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन उसने हालात को बेहद गंभीर बताया है। संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव मार्था पोबी ने कहा कि ये प्रदर्शन तेजी से पूरे देश में फैले और इनमें भारी जान-माल का नुकसान हुआ है।
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डोनाल्ड ट्रंप ने 15 जनवरी को दावा किया था कि, उनके दबाव के बाद ईरान ने 800 लोगों की फांसी की योजना रोक दी है। व्हाइट हाउस ने भी कहा कि, अमेरिका की सख्त चेतावनियों का असर पड़ा है और हत्याओं की रफ्तार में कमी आई है। हालांकि, ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि वह अपने आंतरिक मामलों में किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा।
तनाव के बीच ट्रंप प्रशासन ने 18 ईरानी व्यक्तियों और संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि, ये वही लोग हैं जिन्होंने प्रदर्शनकारियों पर क्रूर कार्रवाई की योजना बनाई। अमेरिका का कहना है कि वह ईरानी जनता के साथ खड़ा है, न कि वहां के दमनकारी नेतृत्व के साथ।
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने भी हालात पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि, वह जल्द ईरान लौटकर देश का नेतृत्व करेंगे। पेरिस से जारी एक वीडियो संदेश में पहलवी ने कहा कि, आज ईरान में लड़ाई कब्जे और आजादी के बीच है। ईरानी जनता ने मुझे नेतृत्व के लिए बुलाया है।
पहलवी ने दावा किया कि, अगर ईरान में लोकतांत्रिक सरकार बनती है, तो देश परमाणु सैन्य कार्यक्रम खत्म करेगा, आतंकी संगठनों को समर्थन बंद करेगा और अमेरिका के साथ रिश्ते सामान्य करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि, एक मुक्त ईरान इजराइल को मान्यता देगा और क्षेत्रीय स्थिरता में भूमिका निभाएगा।
ईरान में प्रदर्शनों की सबसे बड़ी वजह आर्थिक बदहाली मानी जा रही है। ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई है। ओपन मार्केट में 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 14.5 लाख रियाल तक पहुंच चुकी है।
महंगाई दर 50 से 70 प्रतिशत के बीच बताई जा रही है। चाय, ब्रेड और ईंधन जैसी जरूरी चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। 28 दिसंबर को तेहरान के बड़े बाजार के व्यापारियों ने हड़ताल की थी, जिसने आग में घी डालने का काम किया।
प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम लीडर खामेनेई और इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ खुलेआम नारे लगाए। कई जगहों पर पुरानी राजशाही व्यवस्था को वापस लाने की मांग भी सुनाई दी। जवाब में सुरक्षा बलों ने लाइव फायरिंग, इंटरनेट बंदी और सामूहिक गिरफ्तारियों का सहारा लिया। सरकार का कहना है कि, ये प्रदर्शन विदेशी साजिश का हिस्सा हैं, जबकि विपक्ष इन्हें जनता की आवाज बता रहा है।
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