नगर निगम के बजट पेश होने से पहले ही पार्षदों के बीच नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। एक पार्षद ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि बजट अच्छा होगा तो विरोध नहीं होगा, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी “कागजी बजट” पेश किए जाने की आशंका है। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम की आर्थिक स्थिति खराब है, ठेकेदारों के भुगतान अटके हुए हैं, इसके बावजूद करोड़ों के काम दिखाए जा रहे हैं और नया कर्ज लेने की तैयारी की जा रही है।
पार्षद ने तंज कसते हुए कहा, “घर में दाने नहीं और अम्मा चली भुनाने,” यानी निगम की वास्तविक हालत कमजोर है, लेकिन बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार निगम पर पहले से आर्थिक दबाव है और करीब 1530 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने की चर्चा भी सामने आ रही है, जिससे वित्तीय प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
वहीं शहर में पानी की समस्या को लेकर भी जनप्रतिनिधियों ने चिंता जताई। पार्षदों का कहना है कि कई इलाकों में गंदा पानी आ रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी और डर का माहौल है। पानी की सप्लाई में गड़बड़ी और सड़कों के गड्ढों को लेकर भी सवाल उठाए गए।
कुछ पार्षद काली रिबन बांधकर विरोध जताते नजर आए, हालांकि उन्होंने साफ किया कि असली विरोध बजट पेश होने और उसकी समीक्षा के बाद किया जाएगा। फिलहाल महापौर के भाषण के बाद होने वाली चर्चा में इन मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी है।