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सुनकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे!भोपाल पहुंचे ईरानी प्रतिनिधि का खुलासा, क्यों रोका गया ईरान के सुप्रीम लीडर का जनाजा?

ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। भोपाल में उनके प्रतिनिधि मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने बताया कि सुरक्षा खतरे के चलते अंतिम संस्कार टाल दिया गया है।
भोपाल पहुंचे ईरानी प्रतिनिधि का खुलासा, क्यों रोका गया ईरान के सुप्रीम लीडर का जनाजा?
मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही

भोपाल। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। उनके प्रतिनिधि मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भोपाल में बताया कि अंतिम संस्कार अभी इसलिए नहीं किया जा रहा है क्योंकि सुरक्षा को लेकर खतरा है।

उनका कहना है कि अगर अभी अंतिम संस्कार किया गया, तो बड़ी संख्या में लोग एक जगह जुटेंगे, जिससे हमले की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए फैसला लिया गया है कि जब तक हालात पूरी तरह शांत और सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक अंतिम संस्कार टाल दिया जाएगा।

भोपाल में जलसे में शामिल हुए प्रतिनिधि

मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही रविवार को भोपाल पहुंचे थे। वे कोहेफिजा इलाके में MIG हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में आयोजित ‘इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन जलसा’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में अलग-अलग धर्मों के लोग मौजूद थे। कार्यक्रम में स्थानीय नेता और समाज के कई प्रमुख लोग भी शामिल हुए।

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मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही

मशहद में जुट सकते हैं 2 करोड़ लोग

मौलाना इलाही के अनुसार, ईरान के शहर मशहद में अंतिम संस्कार होने की संभावना है। अनुमान है कि इस कार्यक्रम में 2 करोड़ से ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इतनी भीड़ में अगर कोई हमला होता है, तो बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है। यही कारण है कि प्रशासन बेहद सतर्क है और जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहता।

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हमले की आशंका क्यों जताई जा रही है?

मौलाना इलाही ने बताया कि हाल के समय में क्षेत्र में तनाव बढ़ा है। ऐसे में बड़ी भीड़ को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि लेबनान में एक दिन में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है।

इस तरह की घटनाओं को देखते हुए ईरान कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। उनका साफ कहना है कि लोगों की जान सबसे ज्यादा जरूरी है, इसलिए अंतिम संस्कार तभी होगा जब पूरी सुरक्षा सुनिश्चित हो जाएगी।

भारत-ईरान के रिश्तों पर क्या बोले इलाही?

अपने संबोधन में मौलाना इलाही ने भारत और ईरान के रिश्तों को बहुत पुराना और मजबूत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच करीब 5000 साल पुराना संबंध है। उन्होंने यह भी कहा कि मुश्किल समय में भारत के लोगों का समर्थन ईरान कभी नहीं भूलेगा। जब कई देशों ने साथ नहीं दिया, तब भारत के लोगों ने सड़कों पर आकर समर्थन जताया। इससे ईरान के लोगों का हौसला बढ़ा।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और भारत का संबंध

मौलाना इलाही ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का जिक्र करते हुए कहा कि यह रास्ता भारत के लिए महत्वपूर्ण है और इसे खुला रखा गया है।
उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच आज भी गहरा जुड़ाव है, जो सिर्फ राजनीति तक नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर भी मजबूत है।

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खामेनेई के व्यक्तित्व पर क्या कहा गया?

मौलाना इलाही ने अली खामेनेई को सादगी पसंद और सिद्धांतों पर चलने वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि खामेनेई को भारत की संस्कृति में भी गहरी रुचि थी।
उन्होंने बताया कि ईरान के बच्चे भारत के महापुरुषों के बारे में पढ़ते हैं। खुद उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया की भी प्रशंसा की।

युद्ध को लेकर क्या बोले इलाही?

मौलाना इलाही ने अपने भाषण में अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया, बल्कि यह लड़ाई अमेरिका और इजरायल की वजह से शुरू हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों के कारण यह तनाव बढ़ा। उनका कहना है कि ईरान ने बातचीत की कोशिश की थी, लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया।

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ईरान को बांटने की साजिश का आरोप

मौलाना इलाही ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ईरान की सरकार को कुछ ही दिनों में गिराने की योजना बना रहा था। इसके बाद देश को कई हिस्सों में बांटने की साजिश थी।

स्थानीय स्तर पर श्रद्धांजलि और मुलाकातें

भोपाल में फतेहगढ़ इलाके में शिया समुदाय ने खामेनेई को श्रद्धांजलि दी। यहां मौलाना इलाही और अन्य प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा उन्होंने शहर के उलेमाओं से भी मुलाकात की और मौजूदा हालात पर चर्चा की।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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