मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की सुरक्षा व्यवस्था चर्चा में है। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू किया था। तेहरान पर हुए हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और उनकी पत्नी की मौत हो गई थी। इस हमले में उनके बेटे मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद 8 मार्च को ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना। हालांकि वह अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। 12 मार्च को ईरानी टीवी पर उनका एक बयान एंकर के जरिए पढ़कर सुनाया गया, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी जारी रखने और हमलों में मारे गए लोगों का बदला लेने की बात कही गई।
ईरान के सुप्रीम लीडर की सुरक्षा की जिम्मेदारी देश की बेहद गुप्त एलीट फोर्स NOPO के पास होती है। ‘NOPO’ फारसी वाक्य ‘निरूये विजेह पासदारान वेलायत’ का संक्षिप्त रूप है, जिसका अर्थ है सुप्रीम लीडर या सरकार की सुरक्षा के लिए विशेष बल। यह ईरान की आतंकवाद विरोधी विशेष इकाई है जिसकी स्थापना 1991 में की गई थी। यह यूनिट ईरान के स्पेशल यूनिट्स कमांड के तहत काम करती है और इसका गठन रोहल्ला डिविजन से किया गया था। शुरुआती समय में सुप्रीम लीडर की सुरक्षा की जिम्मेदारी इसी डिविजन के पास थी।
NOPO को ईरान की शक्तिशाली सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी से अलग रखा गया है। हालांकि आईआरजीसी सीधे सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार NOPO के कमांडो बेहद घातक और उच्च स्तर के प्रशिक्षित माने जाते हैं। इस यूनिट में चुने गए जवानों को कठिन शारीरिक और सामरिक प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें मार्शल आर्ट, हथियार संचालन और आत्मरक्षा में भी विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। NOPO के कमांडो आमतौर पर काली वर्दी में रहते हैं और बेहद गोपनीय तरीके से ऑपरेशन करते हैं।
NOPO की जिम्मेदारी सिर्फ सुप्रीम लीडर की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इस एलीट फोर्स को ईरान के दो अहम परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी दी गई है। फिलहाल नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी इसी यूनिट के पास बताई जा रही है।
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इस एलीट फोर्स पर कई बार जनआंदोलनों को दबाने और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगे हैं। खास तौर पर सितंबर 2022 में महसा अमीनी की हिरासत में मौत के बाद ईरान में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों को कुचलने में इसकी भूमिका पर सवाल उठे थे। उस आंदोलन में सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा 1999 के छात्र आंदोलन को भी कठोर तरीके से दबाने के आरोप इस बल पर लगे हैं। इन्हीं आरोपों के चलते अमेरिका ने 2021 में NOPO पर प्रतिबंध लगा दिया था।