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Manisha Dhanwani
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Aakash Waghmare
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ईरान और इजराइल के बीच हाल ही में समाप्त हुई 12 दिन की जंग के बाद हालात भले ही शांत नजर आ रहे हों, लेकिन तनाव खत्म नहीं हुआ है। अब अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी के नए बयान से पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और इजराइल की चिंता और बढ़ गई है। ग्रॉसी का कहना है कि ईरान कुछ ही महीनों में फिर से यूरेनियम संवर्धन (यूरेनियम एनरिचमेंट) की प्रक्रिया शुरू कर सकता है, जिससे उसके परमाणु हथियार निर्माण की दिशा में दोबारा कदम बढ़ाने की आशंका जताई जा रही है।
CBS News को दिए एक इंटरव्यू में IAEA चीफ राफेल ग्रॉसी ने कहा कि ईरान के पास अभी भी इतनी वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता मौजूद है कि वह बहुत कम समय में अपने कुछ सेंट्रीफ्यूज यूनिट्स को दोबारा चालू कर यूरेनियम संवर्धन की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह सोचना गलत होगा कि इजराइल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान की परमाणु क्षमता पूरी तरह नष्ट हो चुकी है।
राफेल ग्रॉसी के इस बयान से अमेरिका और इजराइल की चिंताएं और बढ़ गई हैं। दोनों देश पहले ही दावा कर चुके हैं कि उन्होंने फोर्डो, नतांज और एस्फहान जैसे प्रमुख परमाणु ठिकानों को तबाह कर दिया है। लेकिन ग्रॉसी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ईरान के पास जो वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीकी अनुभव है, वह अब नष्ट नहीं किया जा सकता।”
यह स्थायी ज्ञान है जो किसी बम या मिसाइल से खत्म नहीं किया जा सकता। यानी ईरान दोबारा उसी स्तर पर पहुंच सकता है।
जब ग्रॉसी से पूछा गया कि अमेरिकी और इजराइली हमलों से पहले ईरान ने कहीं अपना उच्च संवर्धित यूरेनियम (HEU) कहीं और तो नहीं छिपा दिया था, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस बारे में अभी कोई ठोस जानकारी नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि हो सकता है कि यूरेनियम का कुछ हिस्सा हमलों में नष्ट हो गया हो, लेकिन यह भी संभव है कि बाकी हिस्सा कहीं दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया गया हो।
गौरतलब है कि इजराइल ने इस महीने की शुरुआत में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले शुरू किए थे। अमेरिका भी बाद में इस जंग में शामिल हो गया और उसने फोर्डो, नतांज और एस्फहान जैसी परमाणु साइट्स पर बंकर बस्टर बमों से हमला किया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन हमलों में ईरान को भारी नुकसान पहुंचा है, लेकिन अब IAEA का ताजा बयान इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है।