इंटरनेशनल डेस्क। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेज हो गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद ईरान ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी की सप्लाई होती है। इस मार्ग को लेकर बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान के उप रक्षा मंत्री रेज़ा तलाएई-निक ने ईरानी मीडिया में दिए बयान में कहा कि क्षेत्र में जारी हमले यह दर्शाते हैं कि ईरानी बल 'रणनीतिक भंडार और स्वदेशी उत्पादन' पर निर्भर रहते हुए प्रभावी कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बीते दो दशकों में मिसाइल और ड्रोन निर्माण में किए गए निवेश के कारण इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) अब 'सटीक और प्रभावी' हमले करने में सक्षम है। उनके मुताबिक शुरुआती दौर की तुलना में अब मिसाइल और ड्रोन हमलों की सटीकता में काफी सुधार हुआ है।
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रेज़ा तलाएई-निक ने कहा कि तटीय क्षेत्रों, जहाजों तथा अंदरूनी ठिकानों से क्रूज मिसाइलों के जरिए किए गए हमले ईरान की बढ़ती सैन्य क्षमता का संकेत देते हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी सशस्त्र बल होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को 'वास्तविक रूप से नियंत्रित और परिभाषित' करते हैं। इस बयान को अमेरिका की चेतावनी के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
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इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि वह 48 घंटों के भीतर होर्मुज को पूरी तरह नहीं खोलता है तो अमेरिका उसके विद्युत संयंत्रों पर हमले करेगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि अमेरिका 'सबसे बड़े संयंत्र से शुरुआत करते हुए' ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाएगा। ईरान ने फिलहाल चुनिंदा जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है, जबकि अमेरिका द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा के लिए गठबंधन बनाने का प्रयास अब तक व्यापक समर्थन हासिल नहीं कर सका है। इस घटनाक्रम के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और भू-राजनीतिक चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।