क्या आपने कभी ऐसी बारिश के बारे में सुना है जिसका रंग काला हो? इसे आम भाषा में काली बारिश कहा जाता है। हाल ही में ईरान में लोगों ने ऐसी ही बारिश होने का दावा किया है। बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में भारी धुआं और प्रदूषण फैल गया है। इसी वजह से काली बारिश की चर्चा तेज हो गई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, शहर के कई हिस्सों में धुआं इतना ज्यादा है कि कुछ साफ दिखाई नहीं दे रहा। हवा में जलने जैसी तेज गंध भी महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी के बाद ईरान की राजधानी तेहरान के आसपास कम से कम चार तेल से जुड़ी सुविधाओं पर हमले हुए हैं। इन हमलों के बाद कई जगहों पर आग लग गई और बड़े पैमाने पर धुआं उठने लगा।
9 मार्च को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों की जांच में यह भी सामने आया कि तेहरान की दो बड़ी ऑयल फैसिलिटीज में अब भी आग जल रही थी। इसके अलावा शहर के उत्तर-पश्चिम में स्थित शहरान डिपो और दक्षिण-पूर्व में मौजूद तेहरान ऑयल रिफाइनरी से भी लगातार धुआं उठता देखा गया।
तेहरान एक बड़ा शहर है, जहां करीब एक करोड़ लोग रहते हैं और आसपास के इलाकों में भी लाखों की आबादी है। ऐसे में बढ़ता हुआ प्रदूषण वहां रहने वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
काली बारिश दरअसल कोई आधिकारिक वैज्ञानिक शब्द नहीं है। यह एक आम बोलचाल का नाम है, जो उस बारिश के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिसमें हवा में मौजूद गंदगी और प्रदूषित कण मिल जाते हैं।
जब हवा में बहुत ज्यादा धुआं, कालिख या जहरीले कण होते हैं, तो बारिश की बूंदें उन्हें अपने साथ लेकर जमीन तक पहुंचा देती हैं। इसी वजह से बारिश का पानी गहरा या काला दिखाई देने लगता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह स्थिति आमतौर पर बड़े औद्योगिक हादसों, भारी प्रदूषण या युद्ध के समय देखने को मिलती है।
जब तेल डिपो, रिफाइनरी या किसी बड़े औद्योगिक क्षेत्र में आग लगती है, तो वहां से भारी मात्रा में धुआं निकलता है। इस धुएं में अधजले हाइड्रोकार्बन, कालिख और कई जहरीले कण होते हैं।
ये कण हवा में काफी ऊपर तक चले जाते हैं और बादलों के आसपास फैल जाते हैं। जब बारिश शुरू होती है, तो पानी की बूंदें इन कणों को अपने अंदर समेट लेती हैं।
इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे बारिश की बूंदें एक स्पंज या चुंबक की तरह काम करती हैं, जो हवा में मौजूद जहरीले कणों को पकड़कर नीचे ले आती हैं। यही वजह है कि जमीन पर गिरने वाला पानी काला या गाढ़ा दिखाई देता है।
काली बारिश में कई तरह के हानिकारक रसायन शामिल हो सकते हैं। इनमें सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड, हाइड्रोकार्बन, पीएम 2.5 जैसे बेहद सूक्ष्म कण और पालीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा भारी धातुएं भी इसमें मिल सकती हैं, जो इंसानों और पर्यावरण दोनों के लिए खतरनाक मानी जाती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी चेतावनी दी है कि तेल से जुड़ी सुविधाओं पर हमलों के बाद फैलने वाला धुआं स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इससे सांस की बीमारियां, आंखों में जलन और त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हालात में लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए। प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को बाहर निकलते समय मास्क पहनना चाहिए। इसके अलावा कोशिश करनी चाहिए कि ज्यादा समय घर के अंदर ही रहें। घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखना भी जरूरी है ताकि बाहर की जहरीली हवा अंदर न आए।
इराक और कुवैत में पहले भी तेल के कुओं में आग लगने के बाद महीनों तक धुआं आसमान में छाया रहा था। उस समय भी भारी प्रदूषण और काली बारिश जैसी घटनाएं देखने को मिली थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में मौजूदा हालात भी लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए लंबे समय तक चुनौती बन सकते हैं।