नई दिल्ली। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। मिसाइल हमलों और सीमापार स्ट्राइक के कारण क्षेत्रीय स्थिति जटिल होती जा रही है। हाल ही में ईरान ने हिंद महासागर में स्थित अमेरिकी अड्डा डिएगो गार्सिया निशाना बनाते हुए लंबी दूरी की मिसाइलें दागीं।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना ने अपनी ताकत बढ़ाते हुए तीन नए युद्धपोत और करीब 2,500 मरीन तैनात किए हैं। इससे क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या लगभग 50,000 तक पहुंच गई है।
इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले ही कहा था कि यह ऑपरेशन “जब तक आवश्यक होगा” जारी रहेगा। इसके बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट कर दिया कि जब युद्ध जीत रहे हैं, तो इसे रोकने का सवाल ही नहीं उठता।
ब्रिटेन ने हाल ही में अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए अमेरिका को अपने सैन्य बेस के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। यह कदम क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर असर डाल सकता है।
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इजरायली हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी देशों के तेल और गैस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इसके कारण प्रमुख ऊर्जा आपूर्ति मार्ग बाधित हुए और वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आई। गैस की आपूर्ति भी प्रभावित होने से संभावित संकट उत्पन्न हुआ है।
21 दिन से चल रहे इस संघर्ष का कोई अंत फिलहाल नहीं दिख रहा है। क्षेत्रीय तनाव और जवाबी हमलों के चलते मध्य पूर्व में हालात और गंभीर बने हुए हैं।