कौन हैं प्रबल प्रताप?सुप्रीम कोर्ट में जज पर पेपर उछालने वाले शख्स की पूरी कहानी

घटना के बाद प्रबल प्रताप यादव का नाम पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। जांच में उसके नौकरी से निकाले जाने और पूर्व कंपनी के साथ लंबे विवाद की बात सामने आई है। कंपनी में सहकर्मी को कथित रूप से परेशान करने के आरोप के बाद उसे नौकरी से हटाया गया था। इसके बाद उसने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कानूनी लड़ाई शुरू की, जिसकी सुनवाई के दौरान यह पूरा घटनाक्रम सामने आया।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान फेंके पेपर
Supreme Court में जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान वकील की पोशाक पहनकर पहुंचे प्रबल प्रताप यादव ने अदालत की सामान्य कार्यवाही के अभद्र व्यवहार करना शुरू कर दिया। उसने न्यायाधीशों को असामान्य तरीके से संबोधित किया और अदालत के सामने अपनी मांग को आदेश की तरह रखने लगा। कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोग उसकी हरकत देखकर हैरान रह गए।
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CJI को कहे अपशब्द
सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप ने अपने हाथ में मौजूद करीब 185 पन्नों की फाइल हवा में उछाल दी। आरोप है कि उसने न्यायाधीशों की ओर कागज फेंके और देश के मुख्य न्यायाधीश के लिए भी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया। स्थिति बिगड़ती देख अदालत में मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और उसे कोर्ट रूम से बाहर ले गए। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर माना, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए तत्काल दंडात्मक कार्रवाई नहीं की।
इटावा का रहने वाला है प्रबल प्रताप यादव
जांच में सामने आया कि प्रबल प्रताप यादव उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के भरथना क्षेत्र का रहने वाला है। वह पहले लखनऊ की एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी में नौकरी करता था। नौकरी के दौरान उसका कंपनी प्रबंधन और सहकर्मियों के साथ विवाद बढ़ने लगा। धीरे-धीरे मामला इतना गंभीर हो गया कि कंपनी ने उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी। इसके बाद उसकी नौकरी से निकाल दिया गया।
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महिला सहकर्मी को परेशान करने के आरोप के बाद गई नौकरी
जानकारी के अनुसार, कंपनी में काम करने के दौरान प्रबल प्रताप पर एक महिला सहकर्मी को कथित तौर पर लगातार परेशान करने और आपत्तिजनक ईमेल भेजने के आरोप लगे थे। कंपनी ने पहले उसे चेतावनी देकर अपना व्यवहार सुधारने का मौका दिया। लेकिन जब शिकायतें जारी रहीं तो प्रबंधन ने उसे सेवा से हटा दिया। नौकरी खत्म होने के बाद उसने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए कंपनी के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू कर दी।
कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप, लेकिन नहीं मिली राहत
नौकरी जाने के बाद प्रबल प्रताप ने अपनी पूर्व कंपनी पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने जैसे गंभीर आरोप लगाए और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। इसी सिलसिले में उसकी याचिका सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। सुनवाई के दौरान उसके व्यवहार को देखते हुए अदालत ने उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी।












