वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई फरवरी के 2.13% से बढ़कर मार्च में 3.88% पर पहुंच गई। यह पिछले 38 महीनों का उच्च स्तर है और अलग-अलग सेक्टर्स में कीमतों में बढ़ोतरी इसका मुख्य कारण बनी है।
मार्च में रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं में महंगाई सबसे ज्यादा बढ़ी है। इस श्रेणी में महंगाई दर बढ़कर 6.36 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो 14 महीने का उच्च स्तर है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। जहां कुछ उत्पादों के दाम बढ़े, वहीं कई जरूरी चीजों में गिरावट भी दर्ज की गई। धान, सब्जियां, फल और दूध की कीमतों में हल्की तेजी रही। दूसरी ओर गेहूं, आलू और प्याज की कीमतों में गिरावट ने कुछ राहत भी दी।
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ईंधन और बिजली खंड में मार्च के दौरान कुछ बदलाव देखने को मिला। फरवरी में जहां यह पार्ट गिरावट में था, वहीं मार्च में इसमें 1.05 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह पिछले 11 महीनों की गिरावट के बाद पहली सकारात्मक बढ़ोतरी है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर एनर्जी कीमतों पर साफ नजर आया। कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी ने इस खंड को ऊपर धकेला। इससे आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
निर्मित वस्तुओं की महंगाई दर भी मार्च में बढ़कर 3.39 प्रतिशत हो गई, जो 40 महीने का उच्च स्तर है। इस खंड का सूचकांक में सबसे ज्यादा योगदान होता है, क्योंकि इसका भार 64 प्रतिशत से अधिक है। इनपुट लागत बढ़ने और कच्चे माल की कीमतों में उछाल का सीधा असर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ा है। इससे उत्पादों की कीमतें बढ़ी हैं और उद्योगों की लागत भी बढ़ी है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह ट्रेंड आगे भी जारी रह सकता है।
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बताया जा रहा है कि मुख्य महंगाई दर भी बढ़कर 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गई है। आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। कमजोर मानसून की आशंका और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में उछाल इसका कारण बन सकते हैं। अनुमान है कि अप्रैल में महंगाई 4.8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है और अगले वित्त वर्ष में औसतन 3.5 से 5 प्रतिशत के बीच रह सकती है।