इंदौर में रियल एस्टेट कारोबारी बंटी नागर की मौत में नया मोड़: पार्षद के रिश्तेदार से लेकर कारोबारियों तक कड़ियां जोड़ रही पुलिस

इंदौर। रियल एस्टेट कारोबारी बंटी उर्फ संदीप नागर की आत्महत्या का मामला अब सिर्फ आर्थिक तंगी तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे बंटी पर बनाए जा रहे कथित आर्थिक दबाव और करोड़ों रुपये के लेनदेन से जुड़े नए नाम सामने आ रहे हैं। परिजनों से दोबारा पूछताछ, मोबाइल फोन की जांच और कारोबारियों के बीच हुई चैटिंग ने पुलिस के सामने कई नई कड़ियां जोड़ दी हैं।पुलिस फिलहाल इस दिशा में जांच कर रही है कि आखिर बंटी पर किस-किस व्यक्ति का कितना आर्थिक दबाव था और क्या लगातार रुपयों की मांग और धमकियों ने उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस का फोकस अब उन लोगों पर है, जिनके साथ बंटी के बड़े आर्थिक लेनदेन थे।
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बायपास के प्रोजेक्ट से शुरू हुई कहानी
गुलमोहर कॉलोनी निवासी 56 वर्षीय बंटी नागर संस्कृति डेवलपर्स के नाम से कॉलोनी विकसित करने का काम करते थे। उन्होंने बायपास के बाल्याखेड़ी क्षेत्र में एक बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया था। पुलिस के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में भाजपा नेता के रिश्तेदार राजेश, रितेश और बंटी गोयल का पैसा लगा हुआ था।प्रोजेक्ट में रुपयों के लेनदेन को लेकर विवाद की स्थिति बनी और बंटी पर लगातार दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है। इसी बीच उनका एक अन्य प्रोजेक्ट सुपर कॉरिडोर के समीप भी चल रहा था। वहां भी पैसों के लेनदेन को लेकर परेशानी बताई गई है।यानी बंटी के सामने एक नहीं, बल्कि रियल एस्टेट के कई प्रोजेक्ट और उनसे जुड़े आर्थिक हिसाब-किताब थे। पुलिस अब इन्हीं लेनदेन की पूरी चेन खंगाल रही है।
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मौत के बाद सामने आया दबाव का दूसरा चेहरा
बंटी की मौत के बाद पुलिस ने उनके मोबाइल और संपर्कों की जांच शुरू की थी। जांच में बड़ी संख्या में कॉल और लगातार संपर्क में रहने वाले लोगों की जानकारी सामने आई थी। अब परिजनों से दोबारा बातचीत के दौरान पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण चैट भी मिली हैं।इन चैट और बयानों के आधार पर परिजनों ने दर्जी कराडिया के विष्णु, राजेश, बंटी, मनोज चौधरी, महेश दलोदरा, गोविंद नानेरिया और बब्लू उर्फ अशोक भाटिया सहित कई लोगों के नाम पुलिस को बताए हैं। इनमें अशोक भाटिया के साथ करोड़ों रुपये के लेनदेन की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक अशोक की ओर से बंटी पर लगातार दबाव बनाए जाने के साक्ष्य भी मिले हैं। वहीं महेश दलोदरा पर कुछ साल पहले रुपयों को लेकर धमकाने का आरोप भी सामने आया है।
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अब जांच के घेरे में पार्षद का रिश्तेदार
मामले में सबसे अहम कड़ी के रूप में विजय नगर क्षेत्र में रहने वाले एक पार्षद के रिश्तेदार का नाम सामने आया है। पुलिस के अनुसार यह व्यक्ति भी बंटी से रुपयों को लेकर दबाव बना रहा था।पुलिस को जानकारी मिली है कि इस व्यक्ति के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ था। जमीनों की खरीद-फरोख्त और कथित हेराफेरी से जुड़े मामलों में उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। खास बात यह है कि बंटी और इस व्यक्ति के बीच लंबे समय तक फोन पर बातचीत हुई थी।अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा होती थी और क्या इनमें पैसों की मांग, जमीन के सौदे या किसी पुराने लेनदेन को लेकर दबाव बनाया गया था।
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बीमारी की अफवाह क्यों फैलाई गई?
जांच में पुलिस के सामने एक और महत्वपूर्ण सवाल यह आया है कि बंटी से रुपयों की मांग करने वाले कुछ लोगों की ओर से उनकी बीमारी को लेकर अफवाह क्यों फैलाई जा रही थी। पुलिस को शक है कि इस तरह की बातों के पीछे आर्थिक लेनदेन को लेकर चल रहा कोई विवाद हो सकता है।इसीलिए पुलिस अब केवल बंटी की मौत से ठीक पहले की घटनाओं को नहीं देख रही, बल्कि पिछले कुछ वर्षों के आर्थिक विवादों और धमकियों को भी जोड़कर जांच कर रही है।
मोबाइल, चैट और पुराने लेनदेन बनेंगे अहम कड़ी
बंटी की मौत के बाद उनके मोबाइल फोन पुलिस के लिए जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। अब सामने आई चैटिंग और परिजनों के बयानों के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। पुलिस कॉल डिटेल, चैट, जमीन से जुड़े दस्तावेज और बैंकिंग लेनदेन को आपस में जोड़ रही है।जांच का मुख्य सवाल यही है कि क्या बंटी आर्थिक दबाव के कई मोर्चों पर एक साथ घिरे हुए थे? अगर ऐसा था तो किस व्यक्ति ने कितना दबाव बनाया और क्या किसी ने उन्हें धमकाया या लगातार रुपयों के लिए परेशान किया?फिलहाल पुलिस इन आरोपों की पुष्टि के लिए सबूत जुटा रही है। सामने आए नामों और आरोपों को जांच पूरी होने तक पुलिस संदिग्ध कड़ियों के रूप में देख रही है। आने वाले दिनों में मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और करोड़ों रुपये के लेनदेन की जांच से इस मामले की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।



















