Naresh Bhagoria
20 Jan 2026
इंदौर – शहर में अपराधी बदलते रहे, सरकारें बदलती रहीं, लेकिन इंदौर पुलिस सर्विस में जमे कुछ अधिकारी ऐसे हैं जिनकी कुर्सी अंगद के पैर की तरह एक ही जगह गड़ी रही। अब यह जड़ता उजागर हुई है एक चिट्ठी से विधायक चौधरी सुजीत मेरसिंह ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में खुलकर सवाल दागा, और इसी सवाल ने इंदौर पुलिस में सालों से जमा ‘स्थायी कब्जे’ के खेल का परदा फाड़ दिया। विधायक ने आरोप लगाया कि प्रदेश की ट्रांसफर नीति को धज्जियों में उड़ा कर अधिकारी मलाईदार जिलों में सालों-साल टिके रहते हैं। मनपसंद पोस्टिंग, राजनीतिक सहारे और विभागीय सांठगांठ की इन्हीं के दम पर कई अधिकारी एसआई से एसीपी बनने तक इंदौर नहीं छोड़ते।
इस शिकायत पर पुलिस मुख्यालय हरकत में आया और कमिश्नरेट से उन नामों की पूरी सूची मांगी जो 10 साल से अधिक समय से इंदौर में जमे हुए हैं। जैसे ही ब्योरा निकाला गया। भूकम्प सा खुलासा सामने आया। 33 पुलिस अधिकारी ऐसे हैं जो दस साल से भी ज्यादा से इंदौर में डटे हुए हैं, उनमें से कई तो 17 साल से भी अधिक समय से एक ही जिले में जमा रहकर प्रमोशन की सीढ़ियाँ चढ़ चुके हैं।
यह जमावट सिर्फ विभागीय भ्रष्टाचार की गंध नहीं देती। यह बताती है कि कानून लागू करने वाली मशीनरी किस तरह खुद कानून की नीतियों को ठेंगा दिखाती रही।
मुख्यालय ने भी मांगे थे ‘अंगदों’ के नाम
यह कोई पहली बार नहीं है। पुलिस मुख्यालय इसके पहले भी वर्षों से जमे अफसरों की सूची मांग चुका है। स्वयं डीजीपी कैलाश मकवाणा तीन साल से अधिक एक ही जिले में पदस्थ अधिकारियों को बदले जाने की सिफारिश कर चुके हैं। पर नतीजा? सूची बनती है, लेकिन तबादला नहीं।
सिस्टम ऐसे अधिकारियों को ढोता रहता है जैसे जिले की कमान इन्हीं के बिना चल ही नहीं सकती।
इंदौर के ‘अचल अधिकारियों’ की सूची
(पद – अवधि इंदौर में)
गोपाल सूर्यवंशी – निरीक्षक – 17 साल 4 माह
योगेश राज – एसआई – 18 साल 10 माह
विनोद दीक्षित – एसीपी – 15 साल 9 माह
राकेश गुरगेला – एसीपी – 13 साल 6 माह
कैलाश मकवाना – निरीक्षक – 12 साल 6 माह
खालिद मुश्ताक – निरीक्षक – 12 साल 8 माह
मीना बौरासी – निरीक्षक – 10 साल 4 माह
पप्पूलाल शर्मा – निरीक्षक – 10 साल 10 माह
सोमा मलिक – निरीक्षक – 11 साल 11 माह
अनिल यादव – निरीक्षक – 11 साल 3 माह
अन्य निरीक्षकों-सब इंस्पेक्टरों सहित, कुल 33 अधिकारी—10 वर्ष से अधिक से जमे
इस सूची में कुछ अधिकारी ऐसे भी शामिल हैं जो दो बार प्रमोशन ले चुके, लेकिन इंदौर की मिट्टी छोड़ने को तैयार नहीं।