भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भोपाल की नरेला विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में हजारों फर्जी नाम जोड़े जाने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात कर प्रमाण सहित ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और विश्वसनीय होना बेहद जरूरी है, लेकिन नरेला क्षेत्र में सामने आई गड़बड़ियों ने पूरी निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिग्विजय सिंह ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है, ताकि मृत और प्रवासी मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें तथा नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकें। लेकिन नरेला विधानसभा क्षेत्र में इस प्रक्रिया के उलट बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के नाम जोड़ दिए गए हैं, जो संबंधित पते पर रहते ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की गड़बड़ियां पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं।
दिग्विजय सिंह ने बताया कि नरेला विधानसभा के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी मनोज शुक्ला द्वारा की गई जमीनी जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। 21 फरवरी 2026 को जारी अंतिम मतदाता सूची में कई ऐसे नाम दर्ज हैं जिनका उस पते से कोई संबंध ही नहीं है।
1. रतन कॉलोनी करोंद, मकान मालिक पोखन लाल साहू, मकान नंबर 2 में 6 लोग रहते हैं, लेकिन इस पते पर 37 नाम दर्ज हैं।
दिग्विजय सिंह के साथ निर्वाचन आयोग पहुंचे इन मकान मालिकों ने शपथपत्र देकर बताया कि जिन लोगों के नाम उनके पते पर दर्ज हैं, वे वहां न तो रहते हैं और न ही उन्हें वे पहचानते हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से चर्चा के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि लोकतंत्र के लिए पारदर्शी मतदाता सूची बनाना संविधान की मूल आवश्यकता है और इसी पर निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता टिकी हुई है। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के बाद भी यदि फर्जी नाम जोड़े जा रहे हैं, तो यह पूरी प्रणाली की गंभीर विफलता है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें SIR प्रक्रिया पर भरोसा नहीं रह गया है और जो प्रमाण सामने आए हैं, उनके आधार पर संबंधित बीएलओ और उनके सुपरवाइजर के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होती है तो वे स्वयं चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर धरने पर बैठेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम छूट गया है तो उसे फॉर्म-6 के माध्यम से जोड़ा जाए, लेकिन फर्जी नाम जोड़कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने पहले 22 राजनीतिक दलों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर निर्वाचन आयोग को पत्र भी लिखा था, लेकिन आयोग ने उसे स्वीकार तक नहीं किया। उन्होंने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मांग की कि जिन मकान मालिकों ने शपथपत्र देकर शिकायत की है, उनके आधार पर सभी फर्जी नाम तत्काल मतदाता सूची से हटाए जाएं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित की जाए। साथ ही यदि जांच में बीएलओ या अन्य अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उनके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 तथा भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए। इस अवसर पर पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला भी मौजूद थे।