
इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में हुए हत्याकांड ने पुलिस व्यवस्था पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय रहवासियों ने थाना प्रभारी (टीआई) सुशील पटेल पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि इलाके में लंबे समय से खुलेआम नशे का कारोबार चल रहा था और पुलिस की कथित मिलीभगत के चलते आरोपियों के हौसले बुलंद थे।
रहवासियों का आरोप है कि टीआई के नेतृत्व में थाना स्टाफ नशा बेचने वालों पर सख्ती करने के बजाय उन्हें संरक्षण देता रहा। लोगों ने यह भी कहा कि कई बार आरोपियों को पकड़कर थाने लाया गया, लेकिन कथित रूप से पैसे लेकर छोड़ दिया गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि हत्या के मुख्य संदिग्ध विवेक को घटना के एक दिन पहले ही करीब 50 हजार रुपये लेकर छोड़ दिया गया, जबकि उसके खिलाफ पहले से शिकायतें मौजूद थीं।
बताया जा रहा है कि आरोपी विवेक द्वारा जाम का बगीचा और गौरी नगर इलाके में खुलेआम नशा करता और अपने साथियों के साथ दहशत फैलाता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो 8 साल के मासूम के सामने उसके पिता की बेरहमी से चाकू मारकर हत्या जैसी घटना टाली जा सकती थी।
इस हत्याकांड के बाद आक्रोशित रहवासियों ने सीधे तौर पर टीआई सुशील पटेल की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले भी क्षेत्र में अपराध बढ़ते रहे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि अवैध ढाबों और नशे के कारोबार को भी थाना स्तर से संरक्षण मिल रहा था।
मामला तूल पकड़ने के बाद सीपी इंदौर ने टीआई को तलब कर कड़ी फटकार लगाई और लापरवाही पर जवाब तलब किया। इसके तुरंत बाद एसीपी के नेतृत्व में देर रात हीरानगर और बाणगंगा क्षेत्र में छापेमार कार्रवाई की गई।
इसी के बाद देर रात एसीपी के नेतृत्व में हीरानगर और बाणगंगा थाना क्षेत्रों में व्यापक छापेमार कार्रवाई की गई। पुलिस ने एक साथ कई होटलों और ढाबों पर दबिश दी, जहां अवैध रूप से ग्राहकों को बैठाकर शराब परोसी जा रही थी। कार्रवाई के दौरान दाऊ डा ढाबा, गुरु ढाबा, एमके ढाबा, द हट्टी, बुंदेलखंडी ढाबा और बम्बइया ढाबा के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों को सख्त चेतावनी दी और संचालकों को नियमों का पालन करने के निर्देश दिए।
फिलहाल मामले ने तूल पकड़ लिया है और रहवासी टीआई के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर पहले शिकायतों पर ध्यान दिया जाता, तो क्या यह खौफनाक हत्याकांड टाला जा सकता था।