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इंदौर में किडनैपिंग का मास्टर प्लान: अमीर परिवार के बच्चे थे टारगेट, मासूम बने शिकार

अमीर परिवारों के बच्चों को निशाना बनाने की साजिश रचने वाले आरोपियों ने पहले रेकी की, लेकिन नाकाम रहने पर ग्रेटर तिरुपति से मासूमों का अपहरण कर लिया। पैसों की जरूरत में उन्होंने ज्वेलरी लूट का प्लान छोड़ा और किडनैपिंग को अंजाम दिया, पुलिस को अहम डिजिटल सबूत मिले हैं।
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अमीर परिवार के बच्चे थे टारगेट, मासूम बने शिकार

इंदौर में बच्चों के अपहरण का सनसनीखेज मामला अब और भी खतरनाक मोड़ ले चुका है। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों का असली टारगेट धनाढ्य परिवारों के बच्चे थे। जब उनकी योजना सफल नहीं हो पाई, तो उन्होंने आसान निशाना तलाशते हुए ग्रेटर तिरुपति क्षेत्र से मासूम बच्चों का अपहरण कर लिया। इस पूरे घटनाक्रम ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों की सेफ्टी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले सुराग

मामले की जांच कर रही पलासिया थाना पुलिस ने आरोपी राधिका प्रजापति, उसके भाई विनीत प्रजापति, ललित सेन और उसकी पत्नी तनीषा को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ शुरू कर दी है। सोमवार को चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस को पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले सुराग मिले हैं, जिनसे साफ होता है कि यह अपहरण कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि पूरी प्लानिंग के तहत अंजाम दिया गया था। 

आरोपियों ने ज्वेलरी शॉप लूटने की योजना बनाई

जांच के दौरान जब पुलिस ने आरोपी राधिका के मोबाइल की रिकॉर्डिंग दोबारा सुनी, तो पता चला कि आरोपियों को पैसों की तत्काल जरूरत थी और इसके लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार थे। पहले आरोपियों ने ज्वेलरी शॉप लूटने की योजना बनाई थी, लेकिन गैंग में पर्याप्त सदस्य नहीं होने के कारण उन्होंने अपहरण को आसान और जल्दी पैसा दिलाने वाला रास्ता समझा।

अपहरण की साजिश को अंतिम रूप

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने पहले गीतानगर इलाके में अमीर परिवारों के बच्चों की रेकी की थी। वे बच्चों की दिनचर्या, आने-जाने के समय और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रख रहे थे, लेकिन वहां उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने अपनी योजना बदलते हुए ग्रेटर तिरुपति क्षेत्र को निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि आरोपी कुत्ता घुमाने के बहाने तिरुपति गार्डन पहुंचे थे। वहां उन्होंने बच्चों को खेलते हुए देखा और उनसे दोस्ती कर ली। कुछ देर तक बच्चों के साथ खेलकर उनका विश्वास जीता और फिर सेंट पॉल स्कूल के पास बैठकर उसी दिन अपहरण की साजिश को अंतिम रूप दे दिया। इसके बाद सुनियोजित तरीके से बच्चों को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए।

तकनीकी साक्ष्यों को सबसे मजबूत आधार

इस पूरे मामले में पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों को सबसे मजबूत आधार मान रही है। तुषार सिंह के अनुसार, आरोपियों की गतिविधियों की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्डिंग, चैटिंग, टावर लोकेशन और मोबाइल में दर्ज आवाज के जरिए हो चुकी है। इन सभी डिजिटल सबूतों को चालान के साथ कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि चारों आरोपी लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे और हर कदम सोच-समझकर उठाया गया था। इस वारदात ने यह साफ कर दिया है कि शहर में संगठित अपराध अब नए तरीके अपना रहे हैं, जहां मासूम बच्चों को भी निशाना बनाया जा रहा है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और आगे और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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