बेगमगंज में बस किराए के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, बोले- पढ़ाई पर पड़ रहा असर

बेगमगंज। यात्री बसों के किराए में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी के विरोध में बेगमगंज में छात्रों ने मोर्चा खोल दिया। Gen Z यानी Generation Z के दर्जनों छात्र रैली निकालते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचे और बढ़ा हुआ किराया कम करने की मांग को लेकर एसडीएम प्रियंका भलावी को ज्ञापन सौंपा। छात्रों का कहना है कि बस किराया बढ़ने से रोजाना अप-डाउन करने वाले विद्यार्थियों और गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है।
सागर और भोपाल का किराया हुआ महंगा
छात्रों ने ज्ञापन में बताया कि पहले बेगमगंज से सागर का किराया 80 रुपए था, जिसे बढ़ाकर अब 120 रुपए कर दिया गया है। इसी तरह भोपाल का किराया 150 रुपए से बढ़ाकर 250 रुपए कर दिया गया है। वहीं, सुल्तानगंज से बेगमगंज का किराया भी 25 रुपए से बढ़ाकर 50 रुपए कर दिया गया है। छात्रों के मुताबिक, सुनवाहा, पड़रिया राजाधार, हैदरगढ़ समेत आसपास के गांवों से बेगमगंज पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों के किराए में भी काफी बढ़ोतरी हुई है।
किराया बढ़ने से पढ़ाई पर पड़ रहा असर
छात्रों का कहना है कि किराए में अचानक हुई बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। कई छात्र रोजाना बस से स्कूल और कॉलेज आते-जाते हैं। बढ़ा हुआ किराया वहन करना मुश्किल होने के कारण कुछ विद्यार्थी कई-कई दिन तक स्कूल और कॉलेज नहीं जा पा रहे हैं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और वे अन्य छात्रों से पीछे छूट रहे हैं।
छात्रों ने मांगी रियायती बस सुविधा
छात्रों ने मांग की है कि यात्री किराए में हुई बढ़ोतरी की समीक्षा कर इसे कम किया जाए। उनका कहना है कि अगर किराया बढ़ाना जरूरी था तो इसे सीमित प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता था, लेकिन कई रूट पर किराया लगभग दोगुना कर दिया गया है। छात्रों ने विद्यार्थियों के लिए विशेष रियायती कार्ड बनाने की मांग भी की है, ताकि रोजाना यात्रा करने वाले छात्रों को बस किराए में छूट मिल सके।
SDM को सौंपा ज्ञापन
दर्जनों छात्रों ने रैली निकालकर एसडीएम कार्यालय पहुंचकर एसडीएम प्रियंका भलावी को ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने मांग की कि उनकी समस्या को तत्काल शासन और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाए। छात्रों का कहना है कि किराया कम होने से रोजाना अप-डाउन करने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भी राहत मिलेगी और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।












