इंदौर के ब्रजेश्वरी (एनएक्स) स्थित अर्हम विला अग्निकांड ने एक बार फिर सिस्टम की संवेदनहीनता और घोर लापरवाही को बेनकाब कर दिया। हादसे के सात दिन बाद जब राख ठंडी हो चुकी थी, तब पुलिस और नगर निगम की टीम दोबारा मलबा खंगालने पहुंची और 8 वर्षीय मासूम तनय के शरीर का धड़ बरामद हुआ। सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई कि पहले सर्च ऑपरेशन में बच्चे के अवशेष तक नहीं मिल पाए?
बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया के दफना दिया।
हैरानी की बात यह रही कि पुलिस ने बरामद धड़ को बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया के चुपचाप तिलकनगर मुक्तिधाम ले जाकर दफना दिया। पूरे घटनाक्रम ने जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीईआरएफ की टीम सोफे के जले फोम को ही मानव अवशेष समझकर ले गई थी, जो बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गलत साबित हुआ।
रहवासियों ने की बदबू की शिकायत
इस भीषण अग्निकांड में उद्योगपति मनोज पुगलिया, सिमरन पुगलिया सहित परिवार के कुल 8 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी। आग इतनी भयावह थी कि मासूम तनय के शरीर का बड़ा हिस्सा पूरी तरह जलकर खत्म हो गया था। घटना के बाद आसपास के रहवासियों ने लगातार बदबू की शिकायत की, जिसके बाद मजबूरन प्रशासन को दोबारा मलबा खंगालना पड़ा और तब जाकर सच्चाई सामने आई। मामले में पुलिस अब तक पड़ोसी भरत जैन समेत चार लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है, जबकि मृतक मनोज पुगलिया के बेटों को भी बयान के लिए बुलाया गया, लेकिन वे पेश नहीं हुए। इस बीच परिजनों ने पुलिस की मौजूदगी में घर से जरूरी सामान निकाला, हालांकि मकान अब भी प्रशासनिक कब्जे में है।
इलेक्ट्रिक कार की बैटरी को माना कारण
प्रारंभिक जांच में इस भयावह हादसे की जड़ इलेक्ट्रिक कार की बैटरी को माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, कार को देर रात से तड़के तक लगातार चार्जिंग पर लगाया गया था। ऑटो कट-ऑफ सिस्टम के फेल होने और बिजली सप्लाई दोबारा चालू होने से बैटरी पर अत्यधिक दबाव पड़ा और जोरदार धमाके के साथ आग भड़क उठी। स्मार्ट मीटर और ट्रांसफार्मर के डेटा ने भी इस आशंका को मजबूत किया है।