नई दिल्ली/ गाजियाबाद। इच्छामृत्यु के बाद बुधवार को हरीश राणा को भावभीनी अंतिम विदाई दी गई। ग्रीन पार्क में सुबह करीब 9 बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
अंतिम विदाइ के समय मौजूद रहे पिता ने अपने बेटे के जाने का दर्द बयां किया उन्होने लोगों से हाथ जोड़कर कहा- रोना मत, बेटा शांति से जाए, इसलिए प्रार्थना कर रहा हूं, बेटा अब जहां जन्म लें, उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।
हरीश राणा का मामला देश में गरिमा के साथ मृत्यु के अधिकार’से जुड़ा एक ऐतिहासिक उदाहरण बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति देते हुए एम्स प्रबंधन को उनके जीवनरक्षक उपकरण हटाने की मंजूरी दी थी। इसके बाद चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में पैसिव यूथेनेशिया के तहत उन्हें जीवनरक्षक उपचार से मुक्त किया गया।
गाजियाबाद निवासी हरीश राणा एक सड़क दुर्घटना के बाद कोमा में चले गए थे। उनके माता-पिता और भाई ने 13 वर्षों तक देशभर के डॉक्टरों से सलाह ली और हर संभव इलाज कराया, लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। जिसके बाद बेहद भावुक कर देने वाला देश के सर्वोच्च न्यायालय के पास पहुंचा जिसमें SC ने एम्स को आगे की कार्रवाई के लिए मंजूरी दी।
इस मौके पर यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने परिवार से मुलाकात की और कहा कि यह परिवार पूरे देश के लिए मिसाल है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़ी है। वहीं, ब्रह्मकुमारी संस्था की लवली सिस्टर भी अंतिम संस्कार में पहुंचीं। उन्होंने ही हरीश को गाजियाबाद स्थित घर से अंतिम विदाई दी थी।
विदाई के समय उन्होंने भावुक शब्दों में कहा था - सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ...ठीक है।