बैंकॉक से आया 'खतरनाक बैग'!मुंबई एयरपोर्ट पर 29 विदेशी जीवों के साथ भारतीय यात्री गिरफ्तार, गिब्बन-अजगर समेत दुर्लभ प्रजातियां बरामद

मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर वन्यजीव तस्करी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। बैंकॉक से मुंबई लौट रहे एक भारतीय यात्री को कस्टम अधिकारियों ने जांच के दौरान रोका। जब उसके सामान की तलाशी ली गई तो अधिकारियों के होश उड़ गए। यात्री के बैग से 29 विदेशी और दुर्लभ वन्यजीव बरामद किए गए, जिन्हें अवैध तरीके से भारत लाया जा रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई कस्टम्स ने तुरंत वन्यजीव विशेषज्ञों और संबंधित एजेंसियों को सूचना दी। इसके बाद वन्यजीवों की पहचान, रेस्क्यू और इलाज के लिए RAWW (रेस्किंक एसोसिएशन फॉर वाइल्डलाइफ वेलफेयर) की टीम को बुलाया गया। इस कार्रवाई में वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) और वन विभाग ने भी सहयोग किया।
यात्री को हिरासत में लिया गया
प्रारंभिक जांच के बाद अधिकारियों ने आरोपी यात्री को हिरासत में ले लिया। उससे पूछताछ की जा रही है कि वह इतनी बड़ी संख्या में विदेशी वन्यजीव भारत क्यों लेकर आया था और उसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। कस्टम अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और वन्यजीव संरक्षण तथा तस्करी से जुड़े कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बैग में छिपाकर लाए जा रहे थे दुर्लभ जीव
जब्त किए गए वन्यजीवों में कई विदेशी प्रजातियां शामिल हैं। इनमें गिब्बन, मेलानिस्टिक स्क्विरल (काली गिलहरी), बॉल पाइथन (अजगर) और इगुआना जैसे जीव शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन जानवरों को बैग के अंदर छिपाकर लाया जा रहा था ताकि एयरपोर्ट सुरक्षा जांच से बचा जा सके। हालांकि कस्टम अधिकारियों की सतर्कता के कारण तस्करी की यह कोशिश नाकाम हो गई।
एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह जानवरों को छोटे बैगों और बंद डिब्बों में रखने से उनकी जान को गंभीर खतरा होता है। लंबे सफर के दौरान कई जानवर दम घुटने, तनाव या पानी और भोजन की कमी के कारण मर भी जाते हैं।


वन्यजीवों का किया जा रहा इलाज
बरामद किए गए सभी वन्यजीवों की मेडिकल जांच कराई जा रही है। विशेषज्ञ उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रख रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सुरक्षित हैं। RAWW की टीम ने इन जानवरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर उन्हें स्थिर करने और जरूरी उपचार देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कई जानवर सफर के दौरान तनाव में आ जाते हैं, इसलिए उनकी विशेष देखभाल की जा रही है।
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वापस भेजे जाएंगे मूल देश
अधिकारियों के अनुसार डीजीसीए और अन्य संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए इन वन्यजीवों को उनके मूल देश वापस भेजा जाएगा। आमतौर पर ऐसे मामलों में जब्त किए गए विदेशी जीवों को उसी देश में लौटाया जाता है, जहां से उन्हें अवैध रूप से लाया गया होता है।
इस प्रक्रिया में संबंधित देशों की एजेंसियों और वन्यजीव संरक्षण संस्थाओं की भी मदद ली जाती है।
विदेशी जानवरों की बढ़ रही है मांग
एक्पर्ट का कहना है कि भारत में विदेशी और दुर्लभ जानवरों को पालतू जानवर के रूप में रखने का चलन बढ़ रहा है। इसी वजह से तस्कर विदेशों से ऐसे जीवों को अवैध रूप से भारत लाने की कोशिश करते हैं।
गिब्बन, इगुआना, विदेशी सांप और दुर्लभ गिलहरियों जैसी प्रजातियों की काले बाजार में काफी मांग रहती है। कई लोग इन्हें ऊंची कीमत देकर खरीदते हैं, जिसके कारण तस्करी का नेटवर्क लगातार सक्रिय रहता है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी जानवरों को घरों में रखना न केवल उनके लिए नुकसानदायक होता है बल्कि इससे कई तरह की बीमारियों के फैलने का खतरा भी रहता है।
क्या किसी बड़े गिरोह का है हाथ?
फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी यात्री अकेले काम कर रहा था या फिर उसके पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह सक्रिय है। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वन्यजीवों की तस्करी किसी संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करती है। पूछताछ के दौरान यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन जानवरों को भारत में किसे बेचा जाना था और इनके खरीदार कौन थे। जांच एजेंसियां यात्री के संपर्कों, यात्रा रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब किसी यात्री को विदेशी वन्यजीवों की तस्करी करते हुए पकड़ा गया हो। इससे पहले दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और बेंगलुरु एयरपोर्ट पर भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों में कस्टम विभाग और सुरक्षा एजेंसियों ने कई दुर्लभ पक्षियों, सांपों, कछुओं और अन्य विदेशी जीवों को तस्करों से बरामद किया है। अधिकारियों का कहना है कि एयरपोर्ट पर निगरानी लगातार बढ़ाई जा रही है ताकि वन्यजीव तस्करी जैसे अपराधों पर रोक लगाई जा सके।
वन्यजीवों की तस्करी पर सख्ती जरूरी
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्लभ और विदेशी जीवों की तस्करी केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह जैव विविधता और पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा है।











