भारतीय सेना की नई पहचान: छोड़ी ब्रिटिश परंपरा, बंदी जैकेट से लेकर ग्रूमिंग नियमों तक, बदला यूनिफॉर्म का पूरा स्वरूप

नई दिल्ली। भारतीय सेना ने अपनी वर्दी और उससे जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव करते हुए एक नया अध्याय शुरू किया है। 'आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026' मैनुअल में कई ऐसे फैसले शामिल किए गए हैं जो सेना को औपनिवेशिक दौर की परंपराओं से आगे ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। नई व्यवस्था में सैनिकों की ड्रेस, औपचारिक पहनावे, ग्रूमिंग और व्यक्तिगत प्रस्तुति से जुड़े नियमों को नए सिरे से परिभाषित किया गया है। सेना का मानना है कि बदलते समय के साथ भारतीय मूल्यों और आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप इन बदलावों की जरूरत महसूस की जा रही थी।
भारतीय सोच के अनुरूप बदली सैन्य परंपराएं
सेना द्वारा जारी नए मैनुअल में साफ कहा गया है कि वर्दी से जुड़े कई नियमों की समीक्षा देश की बदलती पहचान और भावनाओं को ध्यान में रखकर की गई है। लंबे समय से चले आ रहे कुछ ऐसे प्रतीकों और व्यवस्थाओं को हटाया गया है, जिनकी जड़ें ब्रिटिश शासनकाल से जुड़ी थीं। इन बदलावों का मकसद सेना की गरिमा और अनुशासन को बनाए रखते हुए उसे अधिक भारतीय स्वरूप देना है।
औपचारिक ड्रेस में शामिल हुई बंदी जैकेट
पहली बार सेना के अधिकारियों को औपचारिक अवसरों पर बंदी जैकेट पहनने की अनुमति दी गई है। भारतीय परिधान शैली से प्रेरित यह जैकेट अब फॉर्मल ड्रेस का हिस्सा होगी। सेना का मानना है कि यह बदलाव भारतीय संस्कृति और आधुनिक पेशेवर छवि के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करेगा। बंदी जैकेट के साथ सादे रंग की पैंट और औपचारिक जूते पहनना अनिवार्य होगा।
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सर्दियों के लिए नई यूनिफॉर्म की शुरुआत
नए नियमों के तहत सभी रैंक के सैनिकों के लिए एक नई विंटर ड्रेस लागू की गई है। '3बी' नाम की इस ड्रेस में अंगोला शर्ट, बैटल जैकेट और बेरेट शामिल हैं। सेना के अनुसार यह ड्रेस मौसम के अनुरूप अधिक उपयोगी और सुविधाजनक होगी। इसके जरिए सैनिकों को एक समान और आधुनिक लुक देने की भी कोशिश की गई है।
महिला अधिकारियों के लिए स्पष्ट ड्रेस कोड
महिला अधिकारियों की औपचारिक ड्रेस को लेकर भी नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अब वे सादे रंग की साड़ी या दुपट्टे के साथ कुर्ता-सलवार पहन सकेंगी। बिना आस्तीन वाले कुर्ते और अत्यधिक कैजुअल माने जाने वाले कुछ परिधानों को अनुमति नहीं दी गई है। सेना का कहना है कि ड्रेस कोड में पेशेवर और अनुशासित छवि बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
कई पारंपरिक सैन्य प्रतीकों को किया गया बाहर
मेस ड्रेस नंबर 5 और 6 में इस्तेमाल होने वाली पाउच बेल्ट को सामान्य उपयोग से हटा दिया गया है। हालांकि कुछ विशेष सैन्य समारोहों और रेजिमेंटल कार्यक्रमों में इसकी अनुमति बनी रहेगी। इसके अलावा सेना की शब्दावली में इस्तेमाल होने वाले कुछ पुराने औपनिवेशिक शब्दों को भी हटाने का फैसला किया गया है। यह कदम भारतीय सैन्य पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सैनिकों की प्रस्तुति और अनुशासन
नए मैनुअल में सैनिकों के व्यक्तिगत स्वरूप और अनुशासन से जुड़े नियमों को भी विस्तार से शामिल किया गया है। टैटू और बॉडी पियर्सिंग पर पहले की तरह रोक जारी रहेगी। यूनिफॉर्म के साथ किसी भी प्रकार के ब्रेसलेट पहनने की अनुमति नहीं होगी। मूंछों की लंबाई भी निर्धारित सीमा के भीतर रखनी होगी ताकि सभी कर्मियों का स्वरूप एक जैसा और व्यवस्थित दिखाई दे।
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कॉस्मेटिक्स और व्यक्तिगत सजावट पर सख्ती
महिला सैन्य कर्मियों के लिए कॉस्मेटिक्स से जुड़े नियमों को भी स्पष्ट किया गया है। रंगीन नेल पॉलिश, लिपस्टिक और अन्य आकर्षक सजावटी वस्तुओं के उपयोग पर रोक रहेगी। सेना का मानना है कि वर्दी में सादगी और पेशेवर छवि सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इसी कारण व्यक्तिगत सजावट को सीमित रखने पर जोर दिया गया है।











