मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था को अस्थिर कर दिया है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है, जो अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस परिवहन का सबसे अहम मार्ग माना जाता है। यह संकरा समुद्री रास्ता दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति को संभालता है। हालात तब और बिगड़ गए जब ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी दी। इस बयान के बाद कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों ने अपनी यात्रा रोक दी और खाड़ी क्षेत्र में लंगर डालकर खड़े हो गए। भारत के भी कई जहाज इस क्षेत्र में फंसे होने की खबरें सामने आईं, जिससे देश में LPG आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ने लगी।
ऊर्जा संकट की आशंका को देखते हुए भारत ने पहले से ही अपनी रणनीति तैयार कर ली थी। सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि देश की निर्भरता केवल होर्मुज मार्ग पर न रहे। इसी दिशा में अमेरिका से LPG आयात बढ़ाने का निर्णय लिया गया। यह कदम भारत के लिए बेहद अहम साबित हुआ। जैसे ही होर्मुज में स्थिति बिगड़ी, अमेरिका से गैस आपूर्ति की व्यवस्था सक्रिय हो गई और इसका असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है।
अमेरिका के टेक्सास से रवाना हुआ LPG कार्गो जहाज पिक्सिस पायनियर रविवार सुबह कर्नाटक के मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंच गया। यह जहाज ऐसे समय पर आया है जब वैश्विक आपूर्ति बाधित हो रही है। इस शिपमेंट के पहुंचने से न केवल दक्षिण भारत बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी गैस सप्लाई को लेकर भरोसा मजबूत हुआ है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल एक डिलीवरी नहीं बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति की सफलता का उदाहरण है।
यह राहत यहीं तक सीमित नहीं है। आने वाले दिनों में अमेरिका से और भी बड़े LPG कार्गो भारत पहुंचने वाले हैं। 25 मार्च को अपोलो ओसियन नाम का जहाज लगभग 26,687 टन गैस लेकर आएगा, जो इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम के लिए होगा। इसके अलावा 29 मार्च को एक और जहाज करीब 30,000 टन LPG लेकर पहुंचेगा, जो हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के लिए निर्धारित है। इस तरह केवल एक सप्ताह के भीतर मंगलुरु में 72,700 टन से अधिक गैस की आपूर्ति होने जा रही है।
मंगलुरु बंदरगाह से आने वाली यह गैस केवल स्थानीय उपयोग तक सीमित नहीं है। HPCL की पाइपलाइन यहां से सीधे बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहरों तक जाती है। इसका मतलब है कि दक्षिण भारत के लाखों घरों में रसोई गैस की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय पर की गई सप्लाई ने संभावित संकट को पूरी तरह टाल दिया है। अगर यह व्यवस्था नहीं होती, तो कई राज्यों में गैस की कमी महसूस की जा सकती थी।
मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध अब और अधिक गंभीर रूप लेता जा रहा है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। वहीं, जवाब में ईरान ने भी मिसाइल हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है। कई शहरों में हमलों के कारण भारी नुकसान और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं। इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है और वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी नेतृत्व ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए समय सीमा तय की है। चेतावनी में यह भी कहा गया है कि अगर रास्ता नहीं खोला गया, तो ऊर्जा ठिकानों पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। भारत ने समय रहते अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख कर एक बड़ा संकट टाल दिया। आने वाले समय में भी भारत को अपनी ऊर्जा नीति को और मजबूत बनाना होगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय संकटों का असर घरेलू आपूर्ति पर कम से कम पड़े।