Manisha Dhanwani
22 Jan 2026
दावोस। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने भारत के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौती को लेकर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए प्रदूषण, टैरिफ जैसी व्यापारिक बाधाओं से कहीं ज्यादा गंभीर चुनौती है। उनका यह बयान बुधवार को दावोस में भारतीय मीडिया से बातचीत के दौरान सामने आया। गीता गोपीनाथ स्विट्जरलैंड में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की वार्षिक बैठक में शामिल होने पहुंची थीं।
गीता गोपीनाथ ने कहा कि जब नए बिजनेस, निवेश और आर्थिक विकास की बात होती है, तो चर्चाएं अक्सर व्यापार, टैरिफ और नियमों तक सीमित रह जाती हैं, जबकि प्रदूषण जैसे बुनियादी मुद्दे को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत में प्रदूषण एक बड़ी और लगातार बढ़ती चुनौती है, जिसका असर अब तक लगाए गए किसी भी टैरिफ से कहीं ज्यादा नुकसानदेह साबित हो रहा है।
उन्होंने वर्ल्ड बैंक की 2022 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत में हर साल करीब 17 लाख लोगों की मौत प्रदूषण से जुड़ी वजहों के कारण होती है। यह न सिर्फ स्वास्थ्य संकट है, बल्कि इसका सीधा असर उत्पादकता, श्रम शक्ति और दीर्घकालिक आर्थिक विकास पर भी पड़ता है।गीता का कहना था कि अगर भारत को टिकाऊ और समावेशी विकास की राह पर आगे बढ़ना है, तो उसे व्यापार नीतियों के साथ-साथ पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण को भी नीति निर्माण के केंद्र में लाना होगा। उनके इस बयान को आर्थिक विकास और पर्यावरण संतुलन के बीच जरूरी तालमेल के तौर पर देखा जा रहा है।
गीता गोपीनाथ ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के नजरिए का जिक्र करते हुए कहा कि जब कोई विदेशी निवेशक भारत में कारोबार शुरू करने या यहां रहने के बारे में सोचता है, तो वह सिर्फ नीतियों, टैक्स या टैरिफ को नहीं देखता। वह यह भी आंकलन करता है कि जिस जगह उसे रहना और काम करना है, वह उसके और उसके परिवार के स्वास्थ्य के लिए कितनी सुरक्षित है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी देश या शहर का माहौल ऐसा हो, जहां प्रदूषण का स्तर अधिक हो और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती हो, तो निवेशक वहां कदम रखने से हिचकिचाते हैं। इसीलिए भारत के लिए जरूरी है कि वह आर्थिक सुधारों के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण और बेहतर जीवन गुणवत्ता को भी प्राथमिकता दे, ताकि देश निवेश और विकास दोनों के लिहाज से मजबूत बन सके।