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भारत को टैरिफ से नहीं 'पॉल्यूशन' से खतरा...वैश्विक मंच पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ये क्या बोल गई?

गीता गोपीनाथ ने कहा कि प्रदूषण से निपटना सिर्फ पर्यावरण से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह लोगों की जान बचाने, आर्थिक विकास बढ़ाने और भारत को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बनाने से जुड़ा है।
भारत को टैरिफ से नहीं 'पॉल्यूशन' से खतरा...वैश्विक मंच पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ये क्या बोल गई?
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    दावोस। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने भारत के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौती को लेकर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए प्रदूषण, टैरिफ जैसी व्यापारिक बाधाओं से कहीं ज्यादा गंभीर चुनौती है। उनका यह बयान बुधवार को दावोस में भारतीय मीडिया से बातचीत के दौरान सामने आया। गीता गोपीनाथ स्विट्जरलैंड में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की वार्षिक बैठक में शामिल होने पहुंची थीं।

    पॉल्यूशन जैसे मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया जाता- गीता

    गीता गोपीनाथ ने कहा कि जब नए बिजनेस, निवेश और आर्थिक विकास की बात होती है, तो चर्चाएं अक्सर व्यापार, टैरिफ और नियमों तक सीमित रह जाती हैं, जबकि प्रदूषण जैसे बुनियादी मुद्दे को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत में प्रदूषण एक बड़ी और लगातार बढ़ती चुनौती है, जिसका असर अब तक लगाए गए किसी भी टैरिफ से कहीं ज्यादा नुकसानदेह साबित हो रहा है।

    हर साल 17 लाख मौत पॉल्यूशन से

    उन्होंने वर्ल्ड बैंक की 2022 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत में हर साल करीब 17 लाख लोगों की मौत प्रदूषण से जुड़ी वजहों के कारण होती है। यह न सिर्फ स्वास्थ्य संकट है, बल्कि इसका सीधा असर उत्पादकता, श्रम शक्ति और दीर्घकालिक आर्थिक विकास पर भी पड़ता है।गीता का कहना था कि अगर भारत को टिकाऊ और समावेशी विकास की राह पर आगे बढ़ना है, तो उसे व्यापार नीतियों के साथ-साथ पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण को भी नीति निर्माण के केंद्र में लाना होगा। उनके इस बयान को आर्थिक विकास और पर्यावरण संतुलन के बीच जरूरी तालमेल के तौर पर देखा जा रहा है।

    दुनियाभर के निवशेक कई चीजों पर करते हैं विचार

    गीता गोपीनाथ ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के नजरिए का जिक्र करते हुए कहा कि जब कोई विदेशी निवेशक भारत में कारोबार शुरू करने या यहां रहने के बारे में सोचता है, तो वह सिर्फ नीतियों, टैक्स या टैरिफ को नहीं देखता। वह यह भी आंकलन करता है कि जिस जगह उसे रहना और काम करना है, वह उसके और उसके परिवार के स्वास्थ्य के लिए कितनी सुरक्षित है।

    देश में 'पॉल्यूशन' का कंट्रोल होना जरूरी

    उन्होंने कहा कि अगर किसी देश या शहर का माहौल ऐसा हो, जहां प्रदूषण का स्तर अधिक हो और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती हो, तो निवेशक वहां कदम रखने से हिचकिचाते हैं। इसीलिए भारत के लिए जरूरी है कि वह आर्थिक सुधारों के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण और बेहतर जीवन गुणवत्ता को भी प्राथमिकता दे, ताकि देश निवेश और विकास दोनों के लिहाज से मजबूत बन सके।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...

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