नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर आधिकारिक संवेदना व्यक्त की है। नई दिल्ली में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरान के राजदूत से मुलाकात कर शोक संवेदना प्रकट की और कंडोलेंस रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए। खामनेई की मौत रविवार 28 फरवरी को तेहरान में हुए अमेरिका-इजरायल की एयर स्ट्राइक में हुई थी, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
नई दिल्ली में हुई इस मुलाकात को भारत की कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरान के राजदूत से मिलकर भारत सरकार की ओर से शोक व्यक्त किया। इससे पहले भारत ने उस एयर स्ट्राइक की सार्वजनिक रूप से निंदा नहीं की थी जिसमें अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई थी। यही वजह है कि सरकार के इस कदम को भारत की नीति में हल्के बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इस मुद्दे पर विपक्ष लगातार सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने और आधिकारिक बयान देने की मांग करता रहा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मिडिल ईस्ट के हालात पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा क्षेत्रीय विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन करता रहा है। गौरतलब है कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से ऊर्जा और व्यापारिक संबंध रहे हैं। एक समय भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 13 प्रतिशत तेल ईरान से आयात करता था, लेकिन परमाणु समझौते से ईरान के बाहर होने और अमेरिका के प्रतिबंध लगने के बाद यह व्यापार काफी कम हो गया।
इस बीच मध्य पूर्व में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। अजरबैजान ने ईरान पर अपने एक एयरपोर्ट को निशाना बनाकर ड्रोन हमला करने का आरोप लगाया है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 1,045 सैन्यकर्मियों और नागरिकों की मौत हो चुकी है। ईरानी मीडिया के मुताबिक तेहरान में हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों में एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, फुटबॉल स्टेडियम, नगर निगम की इमारत और कई दुकानों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया है।