देशभर में 15 लाख मेडिकल स्टोर्स बंद :ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का हल्लाबोल, क्या हैं AIOCD की 8 बड़ी मांगें

नई दिल्ली। देशभर में बुधवार को दवा दुकानों पर सन्नाटा देखने को मिला। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर लाखों मेडिकल स्टोर 24 घंटे के बंद में शामिल हुए। यह विरोध ऑनलाइन दवा बिक्री, ई-फार्मेसी कंपनियों की भारी डिस्काउंटिंग और सरकार के कुछ नियमों के खिलाफ किया जा रहा है।
AIOCD का दावा है कि देशभर के 15 लाख से ज्यादा केमिस्ट और ड्रगिस्ट इस हड़ताल में हिस्सा ले रहे हैं। दिल्ली, भोपाल, रायपुर, जयपुर, पटना, मुंबई, बेंगलुरु और कई शहरों में मेडिकल बाजारों पर इसका असर देखने को मिला। हालांकि, मरीजों को राहत देने के लिए अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर, इमरजेंसी फार्मेसी, जन औषधि केंद्र और कुछ बड़ी फार्मेसी चेन को खुला रखा गया है।
आखिर क्यों भड़के देशभर के दवा दुकानदार?
दवा विक्रेताओं का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन दवा डिलीवरी को जो अस्थायी राहत दी गई थी, वही अब उनके कारोबार के लिए खतरा बन गई है। AIOCD के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.एस. शिंदे के मुताबिक, महामारी के समय लोगों तक जरूरी दवाइयां पहुंचाने के लिए सरकार ने ई-फार्मेसी को कई छूट दी थीं। उस दौरान डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन के जरिए दवा बेचने और घर-घर डिलीवरी की अनुमति दी गई थी। अब संगठन का आरोप है कि, बड़ी ऑनलाइन कंपनियां उन्हीं अस्थायी नियमों का इस्तेमाल स्थायी बिजनेस मॉडल के तौर पर कर रही हैं।
किन नियमों को वापस लेने की मांग?
GSR 220(E)
यह अधिसूचना कोविड काल में लाई गई थी, जिसके तहत व्हाट्सएप, ईमेल और डिजिटल पर्चियों के जरिए दवा बिक्री को छूट मिली थी।
GSR 817(E)
यह ई-फार्मेसी रेगुलेशन से जुड़ा ड्राफ्ट नियम है। दवा विक्रेताओं का कहना है कि इसे पूरी तरह लागू किए बिना ऑनलाइन कंपनियां इसका फायदा उठा रही हैं।
AIOCD का आरोप है कि इन दोनों नियमों ने ऑनलाइन कंपनियों के लिए कानूनी धुंधला क्षेत्र तैयार कर दिया है, जहां स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं हो पा रही।
ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर क्या हैं बड़े खतरे?
केमिस्ट संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री सिर्फ व्यापार का मामला नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा से भी जुड़ा मुद्दा है।
1. फर्जी प्रिस्क्रिप्शन का खतरा
संगठन का दावा है कि कई ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म सही तरीके से डॉक्टर की पर्ची जांचे बिना दवाइयां बेच रहे हैं।
2. प्रतिबंधित दवाओं की आसान उपलब्धता
एंटीबायोटिक्स, नशीली दवाएं और प्रेग्नेंसी किट जैसी संवेदनशील दवाएं गलत हाथों तक पहुंच सकती हैं।
3. नकली दवाओं का जोखिम
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नकली या एक्सपायरी दवाओं की सप्लाई का खतरा भी बढ़ रहा है।
4. मरीज की मेडिकल हिस्ट्री का अभाव
ऑफलाइन मेडिकल स्टोर्स में केमिस्ट मरीज की दवा हिस्ट्री और प्रिस्क्रिप्शन रिकॉर्ड संभालकर रखते हैं, जबकि ऑनलाइन सिस्टम में यह व्यवस्था कमजोर बताई जा रही है।
छोटे मेडिकल स्टोर्स क्यों परेशान?
AIOCD का कहना है कि लोकल मेडिकल स्टोर सामान्य तौर पर 16% तक के मार्जिन पर काम करते हैं, जबकि ऑनलाइन कंपनियां 20% से 50% तक डिस्काउंट देकर बाजार बिगाड़ रही हैं। दवा दुकानदारों का आरोप है कि, बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां प्रीडेटरी प्राइसिंग कर रही हैं, यानी शुरुआत में भारी छूट देकर छोटे दुकानदारों को बाजार से बाहर करने की कोशिश हो रही है।
AIOCD की 8 बड़ी मांगें
- ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम बनाए जाएं।
- GSR 220(E) और GSR 817(E) अधिसूचनाएं वापस ली जाएं।
- फर्जी प्रिस्क्रिप्शन रोकने के लिए डिजिटल सत्यापन सिस्टम बने।
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भारी डिस्काउंटिंग रोकी जाए।
- डॉक्टर और केमिस्ट का सही पंजीकरण सुनिश्चित हो।
- एक बार इस्तेमाल होने वाला QR कोड आधारित प्रिस्क्रिप्शन सिस्टम लागू किया जाए।
- पूरी व्यवस्था सरकारी पोर्टल के जरिए संचालित हो।
- NPPA, DCGI, CCI और राज्य ड्रग कंट्रोलर ऑनलाइन कंपनियों की जांच करें।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर?
मध्य प्रदेश
भोपाल समेत प्रदेशभर में 3 हजार से ज्यादा मेडिकल स्टोर्स बंद रहे। AIOCD से जुड़े 52 जिला संगठन आंदोलन में शामिल हुए।
छत्तीसगढ़
राज्य में करीब 18 हजार मेडिकल स्टोर बंद रहे। रायपुर में 3 हजार से ज्यादा दुकानों पर ताले लगे।
कर्नाटक
करीब 20 हजार केमिस्टों ने बंद का समर्थन किया।
दिल्ली
राजधानी में करीब 15 हजार मेडिकल स्टोर्स प्रभावित होने की बात कही गई।
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किन राज्यों ने हड़ताल से बनाई दूरी?
सरकार और CDSCO के मुताबिक, कई राज्यों के फार्मेसी संगठनों ने जनता की सुविधा को देखते हुए बंद से दूरी बनाई है।
इन राज्यों में कई दुकानें खुली रहीं-
- उत्तर प्रदेश
- महाराष्ट्र
- पश्चिम बंगाल
- पंजाब
- केरल
- गुजरात
- हरियाणा
- उत्तराखंड
- सिक्किम
- लद्दाख
सरकार का दावा है कि देश में दवाओं की कोई बड़ी कमी नहीं होगी।
मरीजों के लिए क्या इंतजाम किए गए?
हड़ताल के बावजूद मरीजों को जरूरी दवाइयों की दिक्कत न हो, इसके लिए प्रशासन ने कई इंतजाम किए हैं। अस्पतालों की फार्मेसी, जन औषधि केंद्र, सहकारी मेडिकल स्टोर्स और बड़ी फार्मेसी चेन को खुला रखा गया है। कई राज्यों में हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं और ड्रग इंस्पेक्टरों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। तेलंगाना, चंडीगढ़ और अन्य राज्यों में प्रशासन ने इमरजेंसी सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था की है।
सरकार और ड्रग रेगुलेटर का क्या कहना है?
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने कहा है कि खुदरा दवा विक्रेताओं की चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। हाल ही में AIOCD प्रतिनिधियों और ड्रग रेगुलेटर अधिकारियों के बीच बैठक भी हुई थी, जिसमें-
- ई-फार्मेसी नियमों की समीक्षा
- मरीजों की सुरक्षा
- फर्जी दवा बिक्री रोकने
- ऑनलाइन दवा नियंत्रण व्यवस्था मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
सरकार ने यह भी कहा है कि, किसी भी हाल में मरीजों की जान से खिलवाड़ या दवाओं की कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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ट्रांसपोर्ट हड़ताल से भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें
इसी बीच दिल्ली-NCR में 21 से 23 मई तक ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने भी हड़ताल का ऐलान किया है। बढ़े हुए पर्यावरण सेस, महंगे ईंधन और BS-IV वाहनों पर प्रस्तावित रोक के खिलाफ यह आंदोलन किया जाएगा। AIMTC के मुताबिक 68 से ज्यादा ट्रांसपोर्ट संगठन इसमें शामिल हो सकते हैं। अगर ट्रांसपोर्ट सेवाएं प्रभावित होती हैं तो दवाओं की सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पर असर पड़ सकता है।
Ola-Uber-Rapido ड्राइवर भी नाराज
ड्राइवर यूनियनों ने Ola, Uber और Rapido जैसी कंपनियों पर आर्थिक शोषण का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि, पिछले कई सालों से किराया नहीं बढ़ा, जबकि पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। यूनियनों ने चेतावनी दी है कि, अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और बड़ा हो सकता है।
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